Patra-lekhan(Letter-writing)-(पत्र-लेखन)


(2) परीक्षा की तैयारी के संबंध में मित्र को लिखा गया पत्र

मयूर बिहार,
दिल्ली
12-11-1999

प्रिय सुंदर,
नमस्ते।
बहुत दिनों से तुम्हारा पत्र मुझे नहीं मिला। आशा है, तुम मजे में हो। यहाँ मैं इन दिनों परीक्षा की तैयारी में हूँ। दस दिन बाद वार्षिक परीक्षा आरंभ होने जा रही है। घूमना-फिरना बंद है। मित्रों से भी भेंट नहीं होती। मुझे खासकर अँगरेजी से डर लगता है। इसलिए इस विषय की तैयारी में मुझे अधिक समय लगाना पड़ता है। इसके बाद अंकगणित को अधिक समय देता हूँ। मेरा गणित भी बहुत अच्छा नहीं है। फिर भी, इसमें पास कर जाने की पूरी उम्मीद है। देखें, क्या फल निकलता है। तुम्हारी तैयारी कैसी है, लिखना। अपने माता-पितजी को मेरा सादर प्रणाम।

तुम्हारा अभिन्न मित्र,
रमेश कुमार
पता-
श्री सुंदरराम,
पुनाईचक,पटना-1

(3) मामा जी जो आपके जन्मदिन पर उपस्थित न हो सके, परंतु उन्होंने उपहार भेजा। उपहार के लिए धन्यवाद देते हुए उन्हें पत्र लिखिए।

बी-14, जनकपुरी,
नई दिल्ली-110057
दिनांक : 05 जून, 20XX

आदरणीय मामा जी,
सादर प्रणाम।

हम सब यहाँ कुशल हैं और आशा करते हैं कि आप भी कुशल होंगे। मामी जी कैसी हैं? नानी की तबीयत कैसी है ? पत्र के उत्तर में लिखिएगा।

मामा जी आपने जन्मदिन पर आने का वादा किया था, परन्तु आप नहीं आए। मेरे लिए जन्मदिन की ख़ुशी आधी ही रही। यदि आप आते तो कितना अच्छा लगता। माँ भी आपके आने की प्रतीक्षा कर रही थीं। चलिए, इस बार नहीं तो अगली बार अवश्य आइएगा। आपने जो प्यारा-सा कैमरा उपहार स्वरूप भेजा है, वह मेरे लिए सबसे उपयोगी और अमूल्य है। आपने न जाने कैसे मेरे मन की बात जान ली कि मैं बड़ा होकर डिस्कवरी के लिए फोटोग्राफी करना चाहता हूँ। इसके लिए मैं अभी से अभ्यास कर रहा हूँ। आपका आशीर्वाद यदि साथ रहा, तो मेरा सपना अवश्य पूरा होगा। एक बार फिर इस उपहार के लिए धन्यवाद।
नानी व मामी को मेरा प्रणाम बोल दीजिएगा। पत्र का उत्तर अवश्य दीजिएगा।

आपका भांजा,
केशव

(4) आप विद्यालय की ओर से दस दिन की यात्रा पर शिमला गए हैं, माता-पिता को कुशलता का समाचार व अपने अनुभव बताते हुए पत्र लिखिए।

हिमालय एडवेंचर क्लब
शिमला।
दिनांक : 22 जून, 20XX

आदरणीय माता जी एवं पिता जी,
सादर चरण-स्पर्श।

मैं यहाँ कुशल हूँ और आशा करता हूँ कि आप लोग भी वहाँ कुशल होंगे। रिधिमा कैसी है? हम यहाँ 20 तारीख को दोपहर 2 बजे पहुँच गए थे। सफ़र नाचते-गाते, हँसते-खेलते न जाने कब बीत गया पता ही नहीं चला। शिमला पहुँचने पर हमें चार-चार के समूह में बाँट दिया गया और होटल में कमरे दे दिए गए। मेरे साथ मेरे तीन अच्छे दोस्त हैं। सुबह जल्दी उठकर तैयार होकर नाश्ते के लिए पहुँचना होता है, फिर हमें यहाँ के दर्शनीय स्थल दिखाने के लिए ले जाया जाता है। रात को 'कैंप फायर' भी होता है। सब खूब नाचते-गाते हैं। दो दिन बाद हमें ट्रैकिंग के लिए ले जाया जाएगा, जहाँ हम टेंट में रहेंगे। टेंट कैसे लगाया जाता है, पहाड़ियों पर चढ़ना व कसरत आदि सिखलाई जाएगी। पहाड़ियों की सुंदरता की तो बात ही निराली है।

माँ आप चिंता मत कीजिएगा। आप ने मुझे यात्रा पर भेजकर अच्छा ही किया, क्योंकि मुझे यहाँ नई-नई चीजें सीखने को मिल रही हैं और नए अनुभव हो रहे हैं। हम शिमला से दिल्ली के लिए 28 तारीख की शाम को रवाना होंगे और 29 तारीख की सुबह दिल्ली पहुँच जाएँगे। अपना ख्याल रखिएगा।

आपका बेटा,
निकुंज

(5) आप छमाही परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त नहीं कर पाए। कारण बताते हुए बड़े भाई को पत्र लिखिए।

परीक्षा भवन,
नई दिल्ली।
दिनांक : 23 सितंबर, 20XX

आदरणीय भैया,
सादर प्रणाम।

मैं यहाँ कुशल हूँ और आशा करता हूँ कि आप भी सपरिवार कुशल होंगे। पिछले सप्ताह मेरा परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था। मुझे यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि इस बार मेरे अच्छे अंक नहीं आए हैं। हिंदी, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान में तो अच्छे अंक आए है, परंतु गणित तथा विज्ञान में सौ में से केवल पचपन तथा पैंसठ अंक ही ला पाया हूँ। इस बार कम अंक आने का कारण है कि मैंने इन दोनों विषयों पर अधिक ध्यान नहीं दिया। गणित के अध्यापक भी बहुत सख्त हैं, उनसे कोई सवाल दोबारा पूछने में भी डर लगता है। मैं यह जानता हूँ कि यदि मैंने इन दोनों विषयों पर भी मेहनत की होती, तो परिणाम अच्छा आता।

मैं आपसे वादा करता हूँ कि इस बार मन लगाकर पढ़ाई करूँगा और वार्षिक परीक्षा में अच्छे अंक अवश्य लाऊँगा। शेष सब कुशल है। माता-पिता जी को मेरा प्रणाम और गायत्री को स्नेह दीजिएगा।

आपका प्रिय भाई,
रमेश

(6) चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम आने पर मित्र को बधाई पत्र लिखिए।

224, वसंत कुंज,
नई दिल्ली।

प्रिय गौरव,
मधुर स्मृतियाँ।

मैं यहाँ कुशल हूँ और ईश्वर से तुम्हारी कुशलता की कामना करता हूँ। दो दिन पहले ही तुम्हारा पत्र प्राप्त हुआ। यह जानकर अत्यंत प्रसन्न्ता हुई कि तुमने अंतविद्यालयी चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मेरे परिवार व मेरी ओर से तुम्हें हार्दिक बधाई। तुम बचपन से ही चित्रकला में रुचि लेते आए हो और अपनी कक्षा में भी सबसे सुंदर चित्र बनाते हो। सभी अध्यापक व अध्यापिकाएँ भी तुम्हारी प्रशंसा करते हैं। तुम्हारी मेहनत व लगन का परिणाम आज तुम्हारे सामने है। भविष्य में भी तुम इसी प्रकार सफलता प्राप्त करते रहो, मेरी यही कामना है।

अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना और आरुषी को स्नेह देना। पत्र का उत्तर शीघ्र देना।

तुम्हारा मित्र,
अनुराग

नीचे कुछ विशिष्ठ पत्र लेखन दिया जा रहा है-

अपने पिता को एक पत्र लिखिए जिसमें पूरे परिवार के व्यवहार के लिए एक टीवी खरीदने के लिए अनुरोध कीजिए

स्टेशन रोड,
भागलपुर
15 फरवरी, 1988

पूज्यवर पिताजी,

मुझे आपका पत्र अभी-अभी मिला। मुझे यह जानकर ख़ुशी है कि आप अगले महीने में घर आ रहे हैं। मैं आपको कुछ कष्ट देना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि हमारे घर में एक टीवी रहे। गत वर्ष मैंने आपसे टीवी खरीदने के लिए अनुरोध किया था, लेकिन आपने उसे स्वीकार नहीं किया। आप मुझसे सहमत होंगे कि टीवी एक बहुत उपयोगी चीज है। यदि हमारे घर में टीवी हो तो हम समाचार, फ़िल्म, क्रिकेट और कई प्रकार के मनोरंजन कर सकते हैं।

टीवी मनोरंजन का एक अच्छा साधन है। इससे हमारा बहुत मनोरंजन होगा। इसका शिक्षाणात्मक महत्त्व भी है। विभित्र कार्यक्रमों को देखकर मैं बहुत बातें सीख सकता हूँ। यदि हमारे पास टीवी हो तो वह पुरे परिवार के लिए उपयोगी होगा। माताजी औरतों के कार्यक्रम को पसंद करेंगी। वे भागवत देखना चाहेंगी। मैं टीवी देखकर बहुत-कुछ सीखूँगा। मनोज बच्चों के कार्यक्रम देखकर खुश होगा।

आप देख सकते है कि टीवी हमारे परिवार के लिए आवश्यक है। क्या आप जब घर आएँगे तब कृपा करके एक टीवी खरीद देंगे ?अब टीवी की कीमत अधिक नहीं रही। सस्ते टीवी से भी काम चल जाएगा। मुझे विश्र्वास है कि आप परिवार के व्यवहार के लिए एक टीवी खरीद देंगे।
अत्यंत आदर के साथ,

आपका स्त्रेही
प्रकाश
पता-श्री देवेंद्र प्रसाद सिंह,
15 पार्क स्ट्रीट,
कलकत्ता-8

आप एक साइकिल खरीदना चाहते हैं। अपने पिता को एक पत्र लिखिए जिसमें साइकिल खरीदने के लिए कुछ रुपए भेजने के लिए उनसे अनुरोध कीजिए।

महात्मा गाँधी रोड,
जमालपुर
27 फरवरी, 1988

पूज्यवर पिताजी,

करीब एक महीने से मुझे आपका कोई पत्र नहीं मिला है। मुझे डर है कि आप मुझ पर रंज हैं।

आप जानते है कि मुझे पैदल स्कूल जाना पड़ता है। मुझे प्रतिदिन चार मील पैदल चलना पड़ता है। मुझे प्रातः काल 9 बजकर 15 मिनट पर स्कूल के लिए रवाना होना पड़ता है। मुझे सुबह में अध्ययन के लिए अधिक समय नहीं मिलता। जब मैं स्कूल से लौटता हूँ तब मैं बहुत थका हुआ रहता हूँ। इसलिए मैं शाम में मन लगाकर नहीं पढ़ सकता।

यदि मेरे पास एक साइकिल रहे तो मैं काफी समय और शक्ति बचा सकता हूँ। मैं साइकिल चलाना अच्छी तरह जानता हूँ। मैं भीड़वाली सड़कों पर भी साइकिल चला सकता हूँ। क्या आप कृपा करके मुझे एक साइकिल खरीद देंगे ? आप मुझसे सहमत होंगे कि मेरे लिए साइकिल आवश्यक है। मैं कीमती साइकिल लेना नहीं चाहता। सस्ती साइकिल से भी काम चल जाएगा।

कृपा करके मुझे पाँच सौ रुपए भेज दें जिससे मैं एक साइकिल खरीद सकूँ।
माँ को मेरा प्यार। अत्यंत आदर के साथ,

आपका स्त्रेही,
मोहन
पता- श्री महेंद्र प्रसाद,
जलकद्यरबाग,
पटना-8

आपके पिता ने आपके जन्म-दिन के अवसर पर आपको 3000 रुपए का उपहार भेजा है। उपहार के लिए धन्यवाद देते हुए उनको पत्र लिखिए जिसमें उनको बतलाइए कि आप रुपए को कैसे खर्च करना चाहते हैं।

कलमबाग रोड,
मुजफ्फरपुर,
17 जनवरी, 1998

पूज्यवर पिताजी,

मेरे जन्म-दिन के अवसर पर मुझे उपहार में 3000 रुपए भेजने के लिए आपको धन्यवाद। आपका अच्छा उपहार पाकर मुझे बहुत ख़ुशी हुई।

आप जानना चाहेंगे कि मैं आपके द्वारा भेजे गए रुपए को कैसे खर्च करना चाहता हूँ। आप जानते है कि मुझे फोटोग्राफी में रूचि है। गत वर्ष मैंने आपसे एक कैमरा के लिए अनुरोध किया था, लेकिन आपने मेरे अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। अब मैं कैमरा खरीद सकूँगा। मुझे कुछ दिनों से कैमरा की बहुत चाह रही है। मैं जब फोटो खींचना चाहता था, तब मुझे अपने मित्र का कैमरा माँगना पड़ता था। मैं बहुत दिनों से कैमरा रखना चाहता हूँ, लेकिन मैं उसे खरीद नहीं सकता था।

अच्छे कैमरे की कीमत बहुत होती है। मैं 3000 रुपए में एक साधारण कैमरा खरीद सकूँगा। मैं सोचता हूँ कि सस्ते कैमरे से भी मेरा काम चल जाएगा।

क्या आप मेरे विचार को पसंद करते है ? मेरा विश्र्वास है कि आप मुझे अपना उपहार मेरी इच्छा के अनुसार खर्च करने देंगे। यदि मेरे पास एक कैमरा रहे तो मैं फोटोग्राफी की कला सीख सकता हूँ। आप मुझसे सहमत होंगे कि फोटोग्राफी एक आनंददायक शौक है।

आपके प्रति अत्यंत आदर और माताजी के प्रति प्रेम के साथ,

आपका प्रिय पुत्र,
संजय
पता- श्री अरुण कुमार सिंह,
चर्च रोड,
राँची