हिन्दी व्याकरण

भाषा

भाषा शब्द संस्कृत के भाष धातु से बना है। इसका अर्थ वाणी को व्यक्त करना है।

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व्याकरण

व्याकरण वह विद्या है जिसके द्वारा हमे किसी भाषा का शुद्ध बोलना, लिखना एवं समझना आता है।

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वर्णमाला

किसी भाषा के समस्त वर्णो के समूह को वर्णमाला कहते हैै।

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शब्द-विचार

दो या दो से अधिक वर्णो से बने ऐसे समूह को शब्द कहते है जिसका कोई न कोई अर्थ अवश्य हो।

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वाक्य विचार

वह शब्द समूह जिससे पूरी बात समझ में आ जाये, 'वाक्य' कहलाता हैै।

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संज्ञा

संज्ञा उस विकारी शब्द को कहते है जिससे किसी वस्तु भाव और जीव के नाम का बोध हो।

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सर्वनाम

जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा के स्थान पर किया जाता है उन्हें सर्वनाम कहते है।

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क्रिया

जिन शब्दों से किसी काम के करने या होने का ज्ञान हो उसे क्रिया कहते है।

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काल

क्रिया के जिस रूप से कार्य करने या होने के समय का ज्ञान होता है उिसे 'काल 'कहते है।

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विशेषण

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता बताते है उन्हें विशेषण कहते है।

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अव्यय

जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, कारक आदि के कारण कोई परिवर्तन नही होता है, उन्हें अव्यय कहते है।

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लिंग

संज्ञा के जिस रूप से व्यक्ति या वस्तु की जाति (स्त्री या पुरूष ) के भेद का बोध होता हो, उसे लिंग कहते है।

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उपसर्ग

उपसर्ग उस शब्दांश को कहते है ,जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ प्रकट करता है।

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संधि

दो वर्णों ( स्वर या व्यंजन ) के मेल से होने वाले विकार को संधि कहते हैं।

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संधि विच्छेद

संधि में पदों को मूल रूप में पृथक कर देना संधि विच्छेद है।

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कारक

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उनका (संज्ञा या सर्वनाम का) सम्बन्ध सूचित हो, उसे (उस रूप को) 'कारक' कहते हैं।

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प्रत्यय

प्रत्यय वह शब्दांश है, किसी शब्द के अन्त में जोड़ा जाता है।

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मुहवारा

ऐसे वाक्यांश, जो सामान्य अर्थ का बोध न कराकर किसी विलक्षण अर्थ की प्रतीति कराये, मुहावरा कहलाता है।

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समास

कम-से-कम शब्दों में अधिक-से-अधिक अर्थ प्रकट करना 'समास' कहलाता है।

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वचन

शब्द के जिस रूप से एक या एक से अधिक का बोध होता है, उसे हिन्दी व्याकरण में 'वचन' कहते है।

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अलंकार

काव्य अथवा भाषा को शोभा बनाने वाले मनोरंजक ढंग को अलंकार कहते है।

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विलोम

एक़-दूसरे के विपरीत या उल्टा अर्थ देने वाले शब्द विलोम कहलाते है।

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संख्याएँ

हिन्दी संख्याएँ एक से लेकर सौ तक दी जा रही है।

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निबन्ध-लेखन

अपने मानसिक भावों या विचारों को संक्षिप्त रूप से तथा नियन्त्रित ढंग से लिखना 'निबन्ध' कहलाता है।

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अनेकार्थी शब्द

ऐसे शब्द, जिनके अनेक अर्थ होते है, अनेकार्थी शब्द कहलाते है।

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एकार्थक शब्द

यहाँ कुछ प्रमुख एकार्थक शब्द दिया जा रहा है।

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अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

यहाँ पर अनेक शब्दों के लिए एक शब्द के कुछ उदाहरण दिए जा रहे है।

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पत्र-लेखन

दूर रहने वाले अपने सबन्धियों अथवा मित्रों की कुशलता जानने के लिए तथा अपनी कुशलता का समाचार देने के लिए पत्र एक साधन है।

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विराम चिह्न

भित्र-भित्र प्रकार के भावों और विचारों को स्पष्ट करने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग वाक्य के बीच या अंत में किया जाता है, उन्हें 'विराम चिह्न' कहते है।

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युग्म शब्द

हिंदी के अनेक शब्द ऐसे हैं, जिनका उच्चारण प्रायः समान होता हैं। किंतु, उनके अर्थ भिन्न होते है। इन्हे 'युग्म शब्द' कहते हैं।

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अनुच्छेद-लेखन

अनुच्छेद के सभी वाक्य एक-दूसरे से गठित और सम्बद्ध होते है।

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कहानी-लेखन

जीवन की किसी एक घटना के रोचक वर्णन को 'कहानी' कहते हैं।

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लोकोक्तियाँ

किसी विशेष स्थान पर प्रसिद्ध हो जाने वाले कथन को 'लोकोक्ति' कहते हैं।

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पल्लवन

किसी सुगठित एवं गुम्फित विचार अथवा भाव के विस्तार को 'पल्लवन' कहते है।

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संवाद-लेखन

दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच हुए वार्तालाप या सम्भाषण को संवाद कहते हैं।

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संक्षेपण

संक्षेपण किसी बड़े ग्रन्थ का संक्षिप्त संस्करण बड़ी मूर्ति का लघु अंकन और बड़े चित्र का छोटा चित्रण है।

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छन्द

वर्णो या मात्राओं के नियमित संख्या के विन्यास से यदि आहाद पैदा हो, तो उसे छंद कहते है।

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रस

काव्य को पढ़ने या सुनने से जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे 'रस' कहा जाता है।

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दिन और महीने

हिन्दी में दिन और महीनों के नाम दिया जा रहा है। भारतीय और ईस्वी कैलेंडर के अनुसार बारह महीनें के अलग-अलग नाम हैं।

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हिंदी का सामान्य ज्ञान

हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार-भारतेंदु हरिशचन्द्र, जयशंकर प्रसाद, मोहन राकेश।

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शब्दार्थ (शब्दों का अर्थ-बोध)

यहाँ कुछ शब्द और उनके अर्थ वाक्य-वाक्य के साथ दिये जाते है।

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धातु

'धातु' क्रियापद के उस अंश को कहते है, जो किसी क्रिया के प्रायः सभी रूपों में पाया जाता है। तात्पर्य यह कि जिन मूल अक्षरों से क्रियाएँ बनती है, उन्हें 'धातु' कहते है।

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पदबंध

जब दो या अधिक (शब्द) पद नियत क्रम और निश्र्चित अर्थ में किसी पद का कार्य करते हैं तो उन्हें पदबंध कहते हैं।

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उपवाक्य

ऐसा पदसमूह, जिसका अपना अर्थ हो, जो एक वाक्य का भाग हो और जिसमें उदेश्य और विधेय हों, उपवाक्य कहलाता हैं।

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शब्दों की अशुद्धियाँ

शुद्ध भाषा के प्रयोग के लिए वर्णों के शुद्ध उच्चारण, शब्दों के शुद्ध रूप और वाक्यों के शुद्ध रूप जानना आवश्यक हैं।

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तार लेखन

कम-से-कम शब्दों में सन्देश भेजने की पद्धति को 'तार' (Telegram) कहते हैं।

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प्रतिवेदन

भूत अथवा वर्तमान की विशेष घटना, प्रसंग या विषय के प्रमुख कार्यो के क्रमबद्ध और संक्षिप्त विवरण को 'प्रतिवेदन' कहते हैं।

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तत्सम-तद्भव शब्द

हिन्दी भाषा का विकास संस्कृत भाषा से हुआ है। अतः इसी भाषा से सीधे शब्द हिन्दी में आये हैं। इन्हें तत्सम शब्द कहते हैं।

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समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द

कुछ शब्द ऐसे होते हैं जिनमें स्वर, मात्रा अथवा व्यंजन में थोड़ा-सा अन्तर होता है।

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वाच्य

क्रिया के उस परिवर्तन को वाच्य कहते हैं, जिसके द्वारा इस बात का बोध होता है कि वाक्य के अन्तर्गत कर्ता, कर्म या भाव में से किसकी प्रधानता है।

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सारांश

मूल अवतरण के भावों अथवा विचारों को संक्षेप में लिखने की क्रिया को 'सारांश' कहते हैं। मूल में जो बात विस्तार से कही गयी है, 'सारांश' में उतनी ही बात संक्षेप में, सार-रूप में कहनी या लिखनी पड़ती है।

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भावार्थ

'सारांश' की तरह 'भावार्थ' भी मूल अवतरण का छोटा रूप है, किंतु 'भावार्थ' लिखने की रीति 'सारांश' की रीति से भिन्न है।

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व्याख्या

'व्याख्या' किसी भाव या विचार के विस्तार और विवेचन को कहते हैं। व्याख्या न भावार्थ है, न आशय। यह इन दोनों से भित्र है। नियम भी भित्र है।

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टिप्पण लेखन

किसी भी विचारधीन पत्र या आवेदन पर उसके निष्पादन (Disposal) को सरल बनाने के लिए जो टिप्पणियाँ सरकारी कार्यालयों में लिपकों, सहायकों तथा कार्यालय अधीक्षकों द्वारा लिखी जाती है, उन्हें टिप्पण-लेखन कहते हैं।

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कार्यालयीय आलेखन

आलेखन पत्राचार का एक अंग है। समाज के विकास के साथ आलेखन के भित्र-भित्र रूप विकसित होते रहे हैं।

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पर्यायवाची शब्द

'पर्याय' का अर्थ है- 'समान' तथा 'वाची' का अर्थ है- 'बोले जाने वाले' अर्थात जिन शब्दों का अर्थ एक जैसा होता है, उन्हें 'पर्यायवाची शब्द' कहते हैं।

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श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द

नीचे कुछ श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द दिए जा रहे है- असन- भोजन- संतुलित असन स्वास्थ्यकर होता है। आसन-बैठने की वस्तु-मेरे गुरु महाराज आसन पर बैठ गये।

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वाक्य-शुद्धि

नीचे कुछ उदाहरण दिए जा रहे है-

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हिन्दी साहित्य

हिन्दी साहित्येतिहास के विभिन्न कालों के नामकरण का प्रथम श्रेय जार्ज ग्रियर्सन को है।

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पाठ-बोधन

किसी दिए गए पाठ को पढ़कर अध्येता द्वारा प्रतिपाद्य विषय तथा गद्यांश में निहित मूल अर्थ को हृदयंगम करना ही पाठ-बोधन कहलाता है।

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शब्द-शक्ति

शब्द का अर्थ बोध करानेवाली शक्ति 'शब्द शक्ति' कहलाती है।

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