Muhavare(Idioms)(मुहावरे)


( फ )

फूलना-फलना (धनवान या कुलवान होना)- मेरा आशीर्वाद है; सदा फूलो-फलो।

फटे में पाँव देना (दूसरे की विपत्ति अपने ऊपर लेना)- शर्मा जी की फटे में पाँव देने की आदत है।

फल चखना (कुपरिणाम भुगतना)- वह जैसा कर्म करेगा, वैसा फल चखेगा।

फुलझड़ी छोड़ना (कटाक्ष करना)- गुप्ता जी तो कोई न कोई फुलझड़ी छोड़ते ही रहते हैं।

फूट डालना (मतभेद पैदा करना)- अंग्रेजों ने फूट डाल कर भारत पर राज किया था।

फूला न समाना (अत्यन्त आनन्दित होना)- जब रवि कक्षा 10 में पास हो गया तो वह फूला नहीं समाया।

फूँककर पहाड़ उड़ाना (असंभव कार्य करना)- धीरज फूँककर पहाड़ उड़ाना चाहता है।

फूटी आँखों न भाना- (तनिक भी न सुहाना)

फफोले फोड़ना- (वैर साधना)

फबतियाँ कसना- (ताना मारना)

फूंक-फूंक कर कदम रखना- (सावधान होकर काम करना)

फूल झड़ना- (मधुर बोलना)

( ब )

बीड़ा उठाना (दायित्व लेना)- गांधजी ने भारत को आजाद करने का बीड़ा उठाया था।

बाजी ले जाना या मारना (जीतना)- देखें, दौड़ में कौन बाजी ले जाता या मारता है।

बेसिर-पैर की बात करना(व्यर्थ की बात करना)- वह तो जब भी देखो, बेसिर-पैर की बात करता है।

बगलें झाँकना (उत्तर न दे सकना)- अध्यापक के सवाल पर राजू बगलें झाँकने लगा।

बगुला भगत(ढोंगी व्यक्ति)- वो साधु तो बगुलाभगत निकला, सबको लूट कर भाग गया।

बाग-बाग होना(बहुत खुश होना)- जब राम अपनी कक्षा में फर्स्ट आया तो उसके माता-पिता का दिल बाग-बाग हो गया।

बोलबाला होना (ख्याति होना)- शहर में सेठ रामचंदानी का बहुत बोलबाला है।

बखिया उधेड़ना (भेद या राज खोलना या पोल खोलना)- आज अजय ने रामू की बखिया उधेड़ दी।

बाँसों उछलना (बहुत खुश होना)- जब बेरोजगार राजू को नौकरी मिल गई तो वह बाँसों उछल रहा था।

बाट जोहना (इन्तजार अथवा प्रतीक्षा करना)- रामू की माँ परदेस गए बेटे की कब से बाट जोह रही है।

बात को गाँठ में बाँधना (स्मरण/याद रखना)- मित्र, मेरी बात को गाँठ में बाँध लो, तुम अवश्य सफल होओगे।

बात खुलना (रहस्य खुलना)- कल सबके सामने रमेश की बात खुल गई।

बात बनाना (झूठ बोलना)- मोहन अब बात बनाना भी सीख गया है।

बुद्धि पर पत्थर पड़ना (अक्ल काम न करना)- आज उसकी बुद्धि पर पत्थर पड़ गए तभी तो उसने 10 लाख का मकान 2 लाख में बेच दिया।

बेपेंदी का लौटा (किसी की तरफ न टिकने वाला)- वह नेता तो बेपेंदी का लौटा है- कभी इस पार्टी में तो कभी उस पार्टी में चला जाता है।

बछिया का ताऊ (मूर्ख व्यक्ति)- धीरू तो बछिया का ताऊ है।

बधिया बैठना (बहुत घाटा होना)- नए रोजगार में तो पवन की बधिया ही बैठ गई।

बहत्तर घाट का पानी पीना (अनेक प्रकार के अनुभव प्राप्त करना)- काका जी बहत्तर घाट का पानी पी चुके हैं, उनको कोई धोखा नहीं दे सकता।

बाएं हाथ का खेल (बहुत सुगम कार्य)- रामू ने कहा कि कबड्डी में जीतना तो उसके बाएं हाथ का खेल है।

बारह बाट करना (तितर-बितर करना)- भाई-भाई की लड़ाई ने राम और श्याम को बारह बाट कर दिया।

बाल की खाल निकालना (छोटी से छोटी बातों पर तर्क करना)- सूरज तो हमेशा बाल की खाल निकालता रहता है।

बाल बाँका न होना (जरा भी हानि न होना)- जिसकी रक्षा ईश्वर करता है उसका बाल भी बाँका नहीं हो सकता।

बुढ़ापे की लाठी (बुढ़ापे का सहारा)- रामू अपने माता-पिता के बुढ़ापे की लाठी है।

बहती गंगा में हाथ धोना- (वह मौका हाथ से न जाने देना जिससे सभी लाभ उठाते हों)

बन्दरघुड़की देना- (धमकाना)

बाजार गर्म होना- (सरगर्मी होना, तेजी होना)

बात का धनी- (वादे का पक्का, दृढप्रतिज्ञ)

बात की बात में- (अतिशीघ्र)

बात चलाना- (चर्चा करना)

बात न पूछना- (निरादार करना)

बात पर न जाना- (विश्वास न करना)

बात रहना- (वचन पूरा करना)

बातों में उड़ाना- (हँसी-मजाक में उड़ा देना)

बात पी जाना- (बर्दाश्त करना, सुनकर भी ध्यान न देना)

बायें हाथ का खेल- (सरल होना)

बाल की खाल निकालना- (छिद्रान्वेषण करना)

बालू की भीत- (शीघ्र नष्ट होनेवाली चीज)

( भ )

भीगी बिल्ली होना (डर से दबना)- वह अपने शिक्षक के सामने भीगी बिल्ली हो जाता है।

भानमती का कुनबा जोड़ना (अलग-अलग तरह की चीजें जोड़ना या इकट्ठा करना)- राजू ने अपने ऑफिस में भानमती का कुनबा जोड़ा हुआ है, उसमें सभी तरह के लोग हैं।

भंडा फूटना (पोल खुलना)- भंडा फूटने के डर से रवि मीटिंग से उठ कर चला गया।

भंडा फोड़ना (पोल खोलना)- जरा-सी कहासुनी पर महेश ने रवि का भंडा फोड़ दिया।

भगवान को प्यारे हो जाना (मर जाना)- सोनू के नानाजी कल भगवान को प्यारे हो गए।

भरी थाली में लात मारना (लगी लगाई नौकरी छोड़ना)- राजू ने भरी थाली में लात मारकर अच्छा नहीं किया।

भांजी मारना (किसी के बनते काम को बिगाड़ना)- रामू के विवाह में उसके ताऊ ने भांजी मार दी।

भेड़ की खाल में भेड़िया (देखने में सरल तथा भोलाभाला, पर वास्तव में खतरनाक)- कालू तो भेड़ की खाल में भेड़िया है।

भैंस के आगे बीन बजाना (वज्र मूर्ख के सामने बुद्धिमानी की बातें करना)- राजू को कोई बात समझाना तो भैंस के आगे बीन बजाना है।

भौंहे टेढ़ी करना (क्रोध आना)- पिताजी की जरा भौंहे टेढ़ी करते ही पिंटू चुप हो गया।

भाड़े का टट्टू- (गया-बीता)

भेड़ियाधसान होना- (देखा-देखी करना)

भाड़ झोंकना- (समय नष्ट करना)

भूत चढ़ना या सवार होना- (किसी बात की जिद पकड़ना, रंज के मारे आगा-पीछा भूल जाना)

भारी लगना- (असहय होना)

भनक पड़ना- (उड़ती हुई खबर सुनना)

( म )

मुँह धो रखना (आशा न रखना)- यह चीज अब मिलने को नही मुँह धो रखिए।

मुँह में पानी आना (लालच होना)- मिठाई देखते ही उसके मुँह में पानी भर आया।

मैदान मारना (बाजी जीतना)- पानीपत की लड़ाई में आखिर अब्दाली ही मैदान मारा।

मिट्टी के मोल बिकना (बहुत सस्ता)- यह मकान मिट्टी के मोल बिक गया

मुट्ठी गरम करना (घूस देना)- मुट्ठी गर्म करने के बाद ही क्लर्क बाबू ने मेरा काम किया।

मुँह बंद कर देना (शांत कराना)- तुम धमकी देकर मेरा मुँह बंद कर देना चाहते हो

मीठी छुरी (छली-कपटी मनुष्य)- वह तो मीठी छुरी है, मैं उसकी बातों में नहीं आती।

मुँह अँधेरे (बहुत सवेरे)- वह नौकरी के लिए मुँह अँधेरे निकल जाता है।

मुँह काला होना (अपमानित होना या कलंकित होना)- उसका मुँह काला हो गया, अब वह किसी को क्या मुँह दिखाएगा।

मुँह की खाना (हारना/पराजित होना)- इस बार तो राजू पहलवान ने मुँह की खाई है, पिछली बार वह जीता था।

मक्खन लगाना (चापलूसी करना)- चपरासी को मक्खन लगाने के बाद भी रामू का काम नहीं बना।

मक्खी मारना (बेकार रहना)- पढ़-लिख कर श्यामदत्त मक्खी मार रहा है।

मगजपच्ची करना (समझाने के लिए बहुत बकना)- इस काठ के उल्लू के साथ कौन मगजपच्ची करे।

मगरमच्छ के आँसू (दिखावटी सहानुभूति प्रकट करना)- राम के फेल होने पर उसके साथी मगरमच्छ के आँसू बहाने लगे।

मरने को भी छुट्टी न होना (अत्यधिक व्यस्त रहना)- आचार्य जी के पास तो मरने की भी छुट्टी नहीं होती।

मरम्मत करना (मारना-पीटना)- माँ ने सुबह-सुबह टीटू की मरम्मत कर दी।

मस्तक ऊँचा करना (प्रतिष्ठा बढ़ाना)- डॉक्टरी पास करके रवि ने अपने माँ-बाप का मस्तक ऊँचा कर दिया।

महाभारत मचाना (खूब लड़ाई-झगड़ा करना)- सोनू और मोनू दोनों बहन-भाई सुबह से महाभारत मचा रहे हैं।

मांग उजाड़ना (विधवा होना)- युवावस्था में ही सीमा की मांग उजड़ गई।

मिजाज आसमान पर होना (बहुत घमंड होना)- नई कार खरीदने के बाद शंभू का मिजाज आसमान पर हो गया है।

मिट्टी का माधो (मूर्ख)- कालू तो मिट्टी का माधो है।

मिट्टी डालना (किसी के दोष को छिपाना)- बच्चों की गलतियों पर मिट्टी नहीं डालनी चाहिए।

मुँह पर कालिख लगना (कलंकित होना)- चोरी करते पकड़े जाने पर राजू के मुँह पर कालिख लग गई।

मुँह पर ताला लगना (चुप रहने के लिए विवश होना)- कक्षा में अध्यापक के आने पर सब छात्रों के मुँह पर ताला लग जाता है।

मुँह पर थूकना (बुरा-भला कहना)- कालू की करतूत देखकर सब उसके मुँह पर थूक गए।

मुँह फुलाना (अप्रसन्नता या असंतुष्ट होकर रूठ कर बैठना)- शांति सुबह से ही अपना मुँह फुलाए घूम रही है।

मुँह सिलना (चुप रहना)- पिताजी के घर आ जाने पर बच्चों का मुँह सिल जाता है।

मूँछ उखाड़ना (गर्व नष्ट करना)- सत्तो पहलवान की आज तक कोई मूँछ नहीं उखाड़ पाया है।

मूँछ नीची होना (लज्जित होना)- जब नौकर ने टका-सा जवाब दे दिया तो ठाकुर साहब की मूँछ नीची हो गई।

मूली-गाजर समझना (अति तुच्छ समझना)- आतंकवादी आम जनता को मूली-गाजर समझते हैं।

मैदान छोड़ना (युद्धक्षेत्र से भाग जाना)- मैदान छोड़ कर भागने वाला कायर होता है।

म्यान से बाहर होना (अत्यन्त क्रुद्ध होना)- अशोक जरा-सी बात पर म्यान से बाहर हो गया।

मर मिटना- (बर्बाद होना)

मांस नोचना- (तंग करना)

मोम हो जाना- (खूब नरम बन जाना)

मन फट जाना- (विराग होना, फीका पड़ना)

मिट्टी में मिलना- (नष्ट होना)

मन चलना- (इच्छा होना)

मन के लड्डू खाना- (व्यर्थ की आशा पर प्रसन्न होना)

मैदान साफ होना- (मार्ग में बाधा न होना)

मीन-मेख करना- (व्यर्थ तर्क)

मन खट्टा होना- (मन फिर जाना)

मिट्टी पलीद करना- (जलील करना)

मोटा आसामी- (मालदार आदमी)

मुठभेड़ होना- (मुकाबला होना)

( य )

यमपुर पहुँचाना (मार डालना)- पुलिस ने चोर को मारमार कर यमपुर पहुँचा दिया।

युक्ति लड़ाना (उपाय करना)- अशोक हमेशा पैसा कमाने की युक्ति लड़ाता रहता।

यश गाना- (प्रशंसा करना, एहसान मानना)

यश मानना- (कृतज्ञ होना)

युग-युग- (बहुत दिनों तक)

युगधर्म- (समय के अनुसार चाल या व्यवहार)

युगांतर उपस्थित करना- (किसी पुरानी प्रथा को हटाकर उसके स्थान पर नई प्रथा चलाना)

( र )

रंग जमना (धाक जमना)- तुम्हारा तो कल खूब रंग जमा।

रंग बदलना (परिवर्तन होना)- जमाने का रंग बदल गया है।

रंग में भंग पड़ना (बिघ्न या बाधा पड़ना)- मीरा की शादी में कुछ असामाजिक तत्वों के आने से रंग में भंग पड़ गया।

रंग उड़ना या रंग उतरना (फीका होना)- सजा सुनते ही अपराधी के चेहरे का रंग उतर गया।

रंगा सियार (धोखेबाज आदमी)- विनोद रंगा सियार है इसलिए उससे सब दूर रहते हैं।

रफूचक्कर होना (भाग जाना)- पुलिस को आते देख चोर रफूचक्कर हो गए।

राई से पर्वत करना या बनाना (छोटे से बड़ा होना)- शांति किसी भी बात को राई से पर्वत कर देती है।

राई का पर्वत होना (बात का बतंगड़ होना)- मुझे क्या पता कि मेरे बोलने से राई का पर्वत हो जाएगा, वर्ना मैं चुप ही रहता।

राई-काई करना (छिन्न-भिन्न करना)- पुलिस ने जरा-सी देर में सारी भीड़ को राई-काई कर दिया।

रंग चढ़ना (प्रभावित होना)- रामू पर दिल्ली के रहन-सहन का रंग चढ़ गया है। अब तो वह कान में मोबाइल लगाए फिरता है।

रंग जमाना (रौब जमाना)- नया मैनेजर सब पर अपना रंग जमा रहा है।

रंग में ढलना (किसी के प्रभाव में आना)- मनोज आवारा लड़कों के साथ रहकर उन्हीं के रंग में ढल गया है।

रंग में भंग करना (आनन्द और हंसी-ख़ुशी में विघ्न डालना)- शादी में लड़ाई करके रवि ने रंग में भंग कर दिया।

रंगे हाथों पकड़ना (अपराध करते हुए पकड़ना)- पुलिस ने चोर को रंगे हाथों पकड़ लिया।

रास्ते का काँटा (उन्नति या प्रगति में बाधक)- मोहन की कड़वी जुबान उसके रास्ते का काँटा हैं।

राह में रोड़ा पड़ना (काम में बाधा आना)- राह में तमाम रोड़े पड़ने पर साहसी लोग कभी नहीं रुकते।

रात-दिन एक करना (निरन्तर कठिन परिश्रम करना)- परीक्षा में पास होने के लिए सुरेश ने रात-दिन एक कर दी।

राम नाम सत्त हो जाना (मर जाना)- कल राजू के परदादा की राम नाम सत्त हो गई।

रामराम होना (मुलाकात होना)- सुबह-सुबह टहलने जाते समय सबसे रामराम हो जाती है।

रास्ता देखना (इन्तजार करना)- राजू की माँ राजू का रोज रास्ता देखती है।

रास्ते पर लाना (सुधारना)- महात्माजी ने अनेक पथ भ्रष्ट लोगों को रास्ते पर ला दिया है।

रुपया पानी में फेंकना (रुपया व्यर्थ खर्च करना)- खटारा कार खरीद कर राम ने रुपया पानी में फ़ेंक दिया है।

रोटी चलाना (भरण-पोषण करना)- रवि मजदूरी करके अपनी रोटी चला रहा है।

रोशनी डालना (स्पष्ट करना)- अध्यापक ने समझ में नहीं आ रहे अध्याय पर रोशनी डाल दी।

रंग लाना- (प्रभाव दिखाना)

रसातल चला जाना- (एकदम नष्ट हो जाना)

रीढ़ टूटना- (आधार समाप्त होना)

रोटियाँ तोड़ना- (बैठे-बैठे खाना)

रोना रोना- (दुखड़ा सुनाना)