Muhavare(Idioms)(मुहावरे)


( त )

तूती बोलना (बोलबाला होना)- आजकल तो राहुल गाँधी की तूती बोल रही है।

तारे गिनना (चिंता के कारण रात में नींद न आना)- अपने पुत्र की चिन्ता में पिता रात भर तारे गिनते रहे।

तिल का ताड़ बनाना (छोटी-सी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना)- शांति तो तिल का ताड़ बनाने में माहिर है।

तीन तेरह करना (नष्ट करना, तितर बितर करना)- जरा-से झगड़े ने दोनों भाइयों को तीन तेरह कर दिया।

तकदीर खुलना या चमकना (भाग्य अनुकूल होना)- सरकारी नौकरी लगने से श्याम की तो तकदीर खुल गई।

तख्ता पलटना (एक शासक द्वारा दूसरे शासक को हटाकर उसके सिंहासन पर खुद बैठना)- पाकिस्तान में मुशर्रफ ने तख्ता पलट दिया और कोई कुछ न कर सका।

तलवा या तलवे चाटना (खुशामद या चापलूसी करना)- ओमवीर ने अफसरों के तलवे चाटकर ही तरक्की पाई है।

तलवे धोकर पीना (अत्यधिक आदर-सत्कार या सेवा करना)- अमन अपने माता-पिता के तलवे धोकर पीता है तभी लोग उसे श्रवण का अवतार कहते हैं।

तलवार की धार पर चलना (बहुत कठिन कार्य करना)- मित्रता निभाना तलवार की धार पर चलने के समान है।

तलवार के घाट उतारना (तलवार से मारना)- राजवीर ने अपने शत्रु को तलवार के घाट उतार दिया।

तलवार सिर पर लटकना (खतरा होना)- आजकल रामू के मैनेजर से उसकी कहासुनी हो गई है इसलिए तलवार उसके सिर पर लटकी हुई है।

तवे-सा मुँह (बहुत काला चेहरा)- किरण का तो तवे-सा मुँह है, फिर भी वह स्वयं को सुंदर समझती है।

तशरीफ लाना (आना)- घर में मेहमान आते हैं तो यही कहते हैं- तशरीफ लाइए।

तांत-सा होना (दुबला-पतला होना)- चार दिन की बीमारी में गौरव तांत-सा हो गया है।

ताक पर धरना (व्यर्थ समझकर दूर हटाना)- सारे नियम ताक पर रखकर अध्यापक ने एक छात्र को नकल करवाई।

ताक में बैठना (मौके की तलाश में रहना)- सुधीर बहुत दिनों से ताक में बैठा था कि उसे मैं कब अकेला मिलूँ और वो मुझे पीटे।

तारीफ के पुल बाँधना (अधिक प्रशंसा या तारीफ करना)- राकेश जब फर्स्ट क्लास पास हुआ तो सभी ने उसकी तारीफ के पुल बाँध दिए।

तारे तोड़ लाना (कठिन या असंभव कार्य करना)- जब विवेक ने अपनी डींग मारनी शुरू की तो मैंने कहा- बस करो भाई! तारे नहीं तोड़ लाए हो, जो इतनी डींग मार रहे हो।

तिनके का सहारा (थोड़ी-सी मदद)- मैंने मोहित की जब सौ रुपए की मदद की तो उसने कहा कि डूबते को तिनके का सहारा बहुत होता है।

तीन-पाँच करना (हर बात में आपत्ति करना)- राघव बहुत तीन-पाँच करता है इसलिए सब उससे दूर रहते हैं।

तीर मार लेना (कोई बड़ा काम कर लेना)- इंजीनियर बनकर आयुष ने तीर मार लिया है।

तीस मारखाँ बनना (अपने को बहुत शूरवीर समझना)- मुन्ना खुद को बहुत तीस मारखाँ समझता है, जब देखो लड़ाई की बातें करता रहता है।

तूफान उठना (उपद्रव खड़ा करना)- मित्र, तुम जहाँ भी जाते हो, वहीं तूफान खड़ा कर देते हो।

तेल निकालना (खूब कस कर काम लेना)- प्राइवेट फर्म तो कर्मचारी का तेल निकाल लेती है। तभी विकास को नौकरी करना पसंद नहीं है।

तेली का बैल (हर समय काम में लगा रहने वाला व्यक्ति)- प्रेमचन्द्र तो तेली का बैल है, जब देखो, रात-दिन काम करता रहता है।

तोता पालना (किसी बुरी आदत को न छोड़ना)- केशव ने तंबाकू खाने का तोता पाल लिया है। बहुत मना किया, मानता ही नहीं है।

तंग हाल (निर्धन होना)- नीरू खुद तंग हाल है, तुम्हें कहाँ से कर्ज देगी।

तकदीर फूटना (भाग्य खराब होना)- उस लड़की की तो तकदीर ही फूट गई जो तुम जैसे जाहिल से उसकी शादी हो गई।

तबीयत आना (किसी पर आसक्ति होना)- वह तो मनमौजी है जब जिस चीज पर उसकी तबीयत आ जाती है तो उसे हासिल करके ही छोड़ता है।

तबीयत भरना (मन भरना, इच्छा न होना)- इस शहर से अब मेरी तबीयत भर चुकी है इसलिए इस शहर को छोड़कर जाना चाहता हूँ।

तरस खाना (दया करना)- ठंड में काँपते हुए उस भिखारी पर तरस खाकर मैंने अपना कंबल उसी को दे दिया।

तह तक पहुँचना (गुप्त रहस्य को मालूम कर लेना)- जब तक वह इस मामले की तह तक नहीं पहुँचेगा तब तक कोई फैसला नहीं सुनाएगा।

तहलका मचना (खलबली मचना)- विमान में बम होने की खबर से चारों ओर तहलका मच गया।

ताँता बंधना (एक के बाद दूसरे का आते रहना)- वैष्णो देवी के मंदिर में दर्शनार्थियों का सुबह से ताँता लग जाता है।

ताक-झाँक करना (इधर-उधर देखना)- दूसरे के घर में ताक-झाँक करना अच्छी आदत नहीं है।

तानकर सोना (निश्चित होकर सोना)- बेटी के विवाह के बाद वह सारी चिंताओं से मुक्त हो गया है और अब तानकर सोता है।

ताल ठोंकना (लड़ने के लिए ललकारना)- उसके सामने तुम ताल मत ठोंको, तुम उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं पाओगे।

ताव आना (क्रोध आना)- मोहनलाल की झूठी बातें सुनकर मुझे ताव आ गया।

तिल-तिल करके मरना (धीरे-धीरे मृत्यु के मुख में जाना)- बेटे के गम में उसने बिस्तर पकड़ लिया है और अब तिल-तिल करके मर रही है।

तिल रखने की जगह न होना (स्थान का ठसाठस भरा होना)- शनिवार के दिन शनि मंदिर में तिल रखने तक की जगह नहीं होती।

तिलमिला उठना (बहुत बुरा मानना)- जब मैंने उसकी पोल खोल दी तो वह तिलमिला उठा।

तिलांजलि देना (त्याग देना)- वर्मा जी ने घर-परिवार को तिलांजलि देकर संन्यास ले लिया।

तुक न होना (कोई औचित्य न होना)- पहले मैं बाजार जाऊँ फिर तुम्हें लेने के लिए घर आऊँ, इसमें कोई तुक नहीं है।

तुल जाना (किसी काम को करने के लिए उतारू होना)- यदि तुम मेहनत करने पर तुल जाओ तो सफलता अवश्य मिलेगी।

तू-तू मैं-मैं होना (आपस में कहा-सुनी होना)- कल रमेश और उसकी पत्नी के बीच तू-तू मैं-मैं हो गई।

तूल पकड़ना (उग्र रूप धारण करना)- बातों-ही-बातों में कहा-सुनी हो गई और झगड़े ने तूल पकड़ ली।

तेल निकालना (खूब कसकर काम लेना)- जमींदार मजदूरों का तेल निकाल लेते थे।

तेवर चढ़ाना (क्रोध के कारण भौहों को तानना)- मुझे परिणाम का अनुमान है। तुम्हारे तेवर चढ़ाने से मैं निर्णय नहीं बदल सकता।

तैश में आना (क्रोध करना)- तैश में आकर किसी का अपमान करना गलत है।

तोबा करना (भविष्य में किसी काम को न करने की प्रतिज्ञा करना)- ईट के व्यापार में घाटा होने से मैंने इससे तोबा कर दिया।

तौल-तौल कर मुँह से शब्द निकालना (बहुत सोच-विचार कर बोलना)- शालिनी बहुत विवेकशील है। वह तौल-तौलकर मुँह से शब्द निकालती है।

त्यौरी/त्यौरियाँ चढ़ना (क्रोध के कारण माथे पर बल पड़ना)- अपमानजनक शब्द सुनते ही उसकी त्यौरियाँ चढ़ गई।

तह देना- (दवा देना)

तह-पर-तह देना- (खूब खाना)

तरह देना- (ख्याल न करना)

तंग करना- (हैरान करना)

तिनके को पहाड़ करना- (छोटी बात को बड़ी बनाना)

ताड़ जाना- (समझ जाना)

तुक में तुक मिलाना- (खुशामद करना)

तेवर बदलना- (क्रोध करना)

ताना मारना-(व्यंग्य वचन बोलना)

ताक में रहना- (खोज में रहना)

तोते की तरह आँखें फेरना- (बेमुरौवत होना)

( त्र )

त्राहि-त्राहि करना (विपत्ति या कठिनाई के समय रक्षा या शरण के लिए प्रार्थना करना)- आग लगने पर बच्चे का उपाय न देखकर लोग त्राहि-त्राहि करने लगे।

त्रिशुंक होना (बीच में रहना, न इधर का होना, न उधर का)- केशव न तो अभी तक आया और न ही फोन किया। समारोह में जाना है या नहीं कुछ भी नहीं पता। मैं तो त्रिशुंक हो गया हूँ।

( थ )

थूक कर चाटना (कह कर मुकर जाना)- कल मुन्ना थूक कर चाट गया। अब उस पर कोई विश्वास नहीं करेगा।

थाली का बैंगन होना (ऐसा आदमी जिसका कोई सिद्धान्त न हो)- आजकल के नए-नए नेता तो थाली के बैंगन हैं।

थाह मिलना या लगना (भेद खुलना)- अब वैज्ञानिकों ने थाह लगा ली है कि मंगल ग्रह पर भी पानी है।

थुक्का फजीहत होना (अपमान होना)- कुमार थुक्का फजीहत होने से पहले ही चला गया।

थुड़ी-थुड़ी होना (बदनामी होना)- बच्चों को बेवजह पीटने पर अध्यापक की हर जगह थुड़ी-थुड़ी हो रही है।

थक कर चूर होना (बहुत थक जाना)- मई की धूप में चार कि० मी० की पैदल यात्रा करने के कारण मैं तो थककर चूर हो गया हूँ।

थर्रा उठना (अत्यंत भयभीत होना)- अचानक इतनी तेज धमाका हुआ कि दूर तक के लोग थर्रा उठे।

थाह लेना (मन का भव जानना)- गंभीर लोगों के मन की थाह लेना मुश्किल होता है।

थैली का मुँह खोलना (खूब धन व्यय करना)- सेठ रामप्रसाद ने अपनी बेटी के विवाह में थैली का मुँह खोल दिया था।

थू-थू करना- (घृणा प्रकट करना)

( द )

दम टूटना (मर जाना )- शेर ने एक ही गोली में दम तोड़ दिया।

दिन दूना रात चौगुना (तेजी से तरक्की करना)- रामदास अपने व्यापार में दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है।

दाल में काला होना (संदेह होना )- हम लोगों की ओट में ये जिस तरह धीरे-धीरे बातें कर रहें है, उससे मुझे दाल में काला लग रहा है।

दौड़-धूप करना (बड़ी कोशिश करना)- कौन बाप अपनी बेटी के ब्याह के लिए दौड़-धूप नहीं करता ?

दो कौड़ी का आदमी (तुच्छ या अविश्र्वसनीय व्यक्ति)- किस दो कौड़ी के आदमी की बात करते हो ?

दो टूक बात कहना (थोड़े शब्दों में स्पष्ट बात कहना)- दो टूक बात कहना अच्छा रहता है।

दो दिन का मेहमान (जल्द मरनेवाला)- किसी का क्या बिगाड़ेगा ? वह बेचारा खुद दो दिन का मेहमान है।

दूध के दाँत न टूटना (ज्ञानहीन या अनुभवहीन)- वह सभा में क्या बोलेगा ? अभी तो उसके दूध के दाँत भी नहीं टूटे हैं।

दूध का दूध और पानी का पानी कर देना (पूरा-पूरा इन्साफ करना)- कल सरपंच ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।

दूज का चाँद होना या ईद का चाँद होना (कभी-कभार दिखाई पड़ना)- मित्र, आजकल तो तुम दूज का चाँद हो रहे हो।

दो नावों पर पैर रखना/दो नावों पर सवार होना (दो काम एक साथ करना)- मित्र, तुम दो नावों पर पैर मत रखो- या तो पढ़ लो, या नौकरी कर लो।

दम खींचना या साधना (चुप रह जाना)- पैसा उधार मांगने पर सेठजीदम साध गए।

दमड़ी के तीन होना (बहुत तुच्छ या सस्ता होना)- आजकल मूली दमड़ी की तीन बिक रही हैं।

दरवाजे की मिट्टी खोद डालना (बार-बार तकाजा करना)- सौ रुपए के लिए श्याम ने राजू के दरवाजे की मिट्टी खोद डाली।

दरार पड़ना (मतभेद पैदा होना)- अब कौशल और कौशिक की दोस्ती में दरार पड़ गई है।

दसों उंगलियाँ घी में होना (खूब लाभ होना)- आजकल रामअवतार की दसों उंगलियाँ घी में हैं।

दाँत पीसना (बहुत क्रोधित होना)- रमेश तो बात-बात पर दाँत पीसने लगता है।

दाँत काटी रोटी होना (अत्यन्त घनिष्ठता होना या मित्रता होना)- आजकल राम और श्याम की दाँत काटी रोटी है।

दाँत खट्टे करना (परास्त करना, हराना)- महाभारत में पांडवों ने कौरवों के दाँत खट्टे कर दिए थे।

दाँतों तले उँगली दबाना (दंग रह जाना)- जब एक गरीब छात्र ने आई.ए.एस. पास कर ली तो सब दाँतों तले उँगली दबाने लगे।

दाई से पेट छिपाना (जानने वाले से भेद छिपाना)- मैं पंकज की हरकत जानता हूँ, फिर भी वह दाई से पेट छिपा रहा था।

दाद देना (प्रशंसा करना)- माहेश्वरी सर के पढ़ाने के ढँग की सभी छात्र दाद देते हैं।

दाना-पानी उठना (आजीविका का साधन खत्म होना या बेरोजगार होना)- लगता है आज रोहित का दाना-पानी उठ गया है। तभी वह मैनेजर को उल्टा जवाब दे रहा है।

दाल-भात में मूसलचन्द (दो व्यक्तियों की बातों में तीसरे व्यक्ति का हस्तक्षेप करना)- शंकर हर जगह दाल-भात में मूसलचन्द की तरह आ जाता है।

दिन में तारे दिखाई देना (अधिक दुःख के कारण होश ठिकाने न रहना)- जब रामू की नौकरी छूट गई तो उसे दिन में तारे दिखाई दे गए।

दिन गँवाना (समय नष्ट करना)- बेरोजगारी में रोहन आजकल यूँ ही दिन गँवा रहा है।

दिन पूरे होना (अंतिम समय आना)- लगता है किशन के दिन पूरे हो गए हैं तभी अत्यधिक धूम्रपान कर रहा है।

दिन पलटना (अच्छे दिन आना)- नौकरी लगने के बाद अब शम्भू के दिन पलट गए हैं।

दिन-रात एक करना (कठिन श्रम करना)- मोहन ने दसवीं पास करने के लिए दिन-रात एक कर दिया था।

दिन आना (अच्छा समय आना)- अभी उनके दिन चल रहे हैं पर कभी-न-कभी हमारे भी दिन आएँगे।

दिन लद जाना (समय व्यतीत हो जाना)- वे दिन लद गए जब जमींदार लोग किसानों पर अत्याचार करते थे।

दिमाग दौड़ाना (विचार करना, अत्यधिक सोचना)- कमल बहुत दिमाग दौड़ाता है तभी वह इंजीनियर बन पाया है।

दिमाग सातवें आसमान पर होना (बहुत अधिक घमंड होना)- सरकारी नौकरी लगने पर परमजीत का दिमाग सातवें आसमान पर हो गया है।

दिमाग खाना या खाली करना (मगजपच्ची या बकवास करना)- मेरे दिमाग खाली करने के बाद भी गणित का सवाल सोनू की समझ में नहीं आया।

दिल टुकड़े-टुकड़े होना या दिल टूटना (बहुत निराश होना)- जब मनीष को मैंने किताब नहीं दी तो उसका दिल टुकड़े-टुकड़े हो गया।

दिल पर पत्थर रखना (दुःख सहकर या हानि होने पर चुप रहना)- रामू के जब पाँच हजार रुपए खो गए तो उसने दिल पर पत्थर रख लिया।

दिल पसीजना (किसी पर दया आना)- भिखारी की दुर्दशा देखकर मेरा दिल पसीज गया।

दिल हिलना (अत्यधिक भयभीत होना)- रात में किसी की परछाई देखकर मेरा दिल हिल गया।

दिल का काला या खोटा (कपटी अथवा दुष्ट)- मुन्ना दिल का काला है।

दिल बाग-बाग होना (अत्यधिक हर्ष होना)- वर्षों बाद बेटा घर आया तो माता-पिता का दिल बाग-बाग हो गया।

दिल कड़ा करना (हिम्मत करना)- जब तक दिल कड़ा नहीं करोगे तब तक किसी काम में सफलता नहीं मिलेगी।

दिल का गुबार निकालना (मन का मलाल दूर करना)- अपने बेटे के विवाह में पंडित रामदीन ने अपने दिल के सारे गुबार निकाल लिए।

दिल की दिल में रह जाना (मनोकामना पूरी न होना)- जिस लड़की से वह विवाह करना चाहता था उससे कह ही नहीं पाया और इस तरह से दिल की दिल में ही रह गई।

दिल के अरमान निकलना (इच्छा पूरी होना)- जब मेरे दिल के अरमान निकलेंगे तब मुझे तसल्ली मिलेगी।

दिल्ली दूर होना (लक्ष्य दूर होना)- अभी तो मोहन ने सिर्फ दसवीं पास की है। उसे डॉक्टर बनना है तो अभी दिल्ली दूर है।

दुनिया की हवा लगना (कुमार्ग पर चलना)- रामू को दुनिया की हवा लग गई है, पहले तो वह बहुत सीधा था।

दुनिया से उठ जाना (मर जाना)- काका हाथरसी दुनिया से उठ गए तो संगीत प्रेमी रोने लगे थे।

दूध का धुला (निष्पाप; निर्दोष)- मुकेश तो दूध का धुला है, लोग उसे चोरी के इल्जाम में खाहमखाह फँसा रहे हैं।

दूध का-सा उबाल आना (एकदम से क्रोध आना)- जैसे ही मैंने पिताजी से रुपए माँगे, उनमें दूध का-सा उबाल आ गया।

दूध की नदियाँ बहना (धन-दौलत से पूर्ण होना)- कृष्ण के युग में मथुरा में दूध की नदियाँ बहती थीं।

दूध की मक्खी (तुच्छ व्यक्ति)- बेरोजगार होने के बाद रामू तो अपने घर में दूध की मक्खी की तरह है।

दूध में से मक्खी की तरह निकालकर फेंकना (अनावश्यक समझकर अलग कर देना)- राजू की कंपनी ने कल उसे दूध में से मक्खी की तरह निकालकर फ़ेंक दिया।

दो-दो हाथ होना (लड़ाई होना)- छोटी-सी बात पर राजू और रामू में दो-दो हाथ हो गए।

दोनों हाथों में लड्डू होना (हर प्रकार से लाभ होना)- अब अजय के तो दोनों हाथों में लड्डू हैं।

दोनों हाथों से लुटाना (खूब खर्च करना)- सुरेश बाप-दादों की संपत्ति दोनों हाथों से लुटा रहा है।

दूर के ढोल सुहावने होना या लगना (दूर की वस्तु या व्यक्ति अच्छा लगना)- जब मैंने वैष्णो देवी जाने को कहा तो पिताजी बोले कि तुम्हें दूर के ढोल सुहावने लग रहे हैं, चढ़ाई चढ़ोगे तब मालूम पड़ेगा।

देवलोक सिधारना (मर जाना)- रामू के पिताजी तो बहुत पहले देवलोक सिधार गए, पर मुझे आज ही ज्ञात हुआ है।

दफा होना (चले जाना)- अगर तुम वहाँ से दफा न हुए होते तो तुम्हारी खैर नहीं थी।

दबदबा मानना (रौब मानना)- सारे मुहल्ले के लोग आपके बेटे का दबदबा मानते हैं।

दबे पाँव आना/जाना (बिना आहट किए आना/जाना)- इस कमरे में दबे पाँव जाना क्योंकि अंदर बच्चा सो रहा है।

दर-दर की खाक छानना/दर-दर-मारा-मारा फिरना (जगह-जगह की ठोकरें खाना)- नौकरी के चक्कर में माधव दर-दर की खाक छानता फिर रहा है।

दशा फिरना (अच्छे दिन आना)- इतने दिनों से वह परेशान चल रही थी। जैसे ही दशा फिरी सब अच्छा-ही-अच्छा हो गया।

दाँत निपोरना (गिड़गिड़ाना)- क्यों दाँत निपोरकर भीख माँग रहे हो, काम क्यों नहीं करते ?

दाने-दाने को तरसना (भूखों मरना)- पिता की मृत्यु के कारण बच्चे दाने-दाने को तरसने लगे हैं।

दाम खड़ा करना (उचित कीमत प्राप्त करना)- आप चाहें तो अपनी पुरानी कार के दाम खड़े कर सकते हैं।

दामन छुड़ाना (पीछा छुड़ाना)- पति की मार सहना उसकी मजबूरी थी। बेचारी पति से दामन छुड़ाकर जाती भी कहाँ ?

दामन पकड़ना (किसी की शरण में जाना)- मैं एक बार जिसका दामन पकड़ लेता हूँ, जीवन भर साथ नहीं छोड़ता।

दाल गलना (युक्ति सफल होना)- उसने मुझे फुसलाने की बहुत कोशिश की पर मेरे आगे उसकी दाल न गली।

दाल रोटी चलना (जीवन निर्वाह होना)- इतनी तनख्वाह मिल जाती है कि किसी तरह दाल-रोटी चल जाती है।

दिल बल्लियों उछलना (बहुत खुश होना)- नौकरी की खबर मिलते ही उसका दिलबल्लियों उछलने लगा।

दिल्लगी करना (मजाक करना)- हर समय दिल्लगी करना अच्छा नहीं लगता।

दुकान बढ़ाना(दूकान बंद करना)- लाला जी ने शाम को सात बजे दुकान बढ़ाई और घर की ओर चल दिए।

दीवारों के कान होना (किसी गोपनीय बात के प्रकट हो जाने का खतरा)- दीवारों के भी कान होते हैं। अतः तुम लोग बात करते समय सावधानी रखा करो।

दुखती रग को छूना (मर्म पर आघात करना)- उसकी दुखती रग को मत छुओ वरना वह रो पड़ेगी।

दुम दबाकर भागना (डटकर भागना/चले जाना)- पुलिस वाले को देखते ही चोर दुम दबाकर भाग गया।

दुलत्ती झाड़ना (दोनों लातों से मारना)- घोड़ा जब दुलत्ती झाड़ता है तब थोड़ी दूर रहना चाहिए।

दुश्मनी मोल लेना (व्यर्थ की दुश्मनी करना)- बैठे बिठाए दुश्मनी मोल लेना कोई अक्लमंदी नहीं है।

दूध की लाज रखना (वीरोचित कार्य करना)- माँ ने अपने बेटे को युद्ध में भेजते समय यही कहा था कि 'बेटे मेरे दूध की लाज रखना। या तो जीत कर लौटना या शहीद हो जाना'।

दूध पीता बच्चा (अबोध एवं निरपराध व्यक्ति)- वह कोई दूध पीता बच्चा नहीं है जो हमेशा उसे टोकती रहती हो।

दृष्टि फिरना (पहले जैसा प्रेम या स्नेह न रहना)- यदि आपकी ही दृष्टि फिर गई तो हमलोग कहाँ जाएँगे?

देखते रह जाना (दंग रह जाना)- इतने छोटे बच्चे के करतब लोग देखते रह गए।

देखते ही बनना (वर्णन न कर पाना)- उन पहाड़ों की छटा देखते ही बनती थी।

देह टूटना (शरीर में दर्द होना)- लगता है इनफैक्शन हो गया है। सुबह से ही मेरी देह टूट रही है।

देह भरना (मोटा हो जाना)- पहले तो वह बहुत कमजोर था पर नौकरी के तीन महीने बाद ही उसकी देह भर गई।

द्वार-द्वार फिरना (घर-घर भीख माँगना)- बेचारा द्वार-द्वार फिरता है तब जाकर पेट भरने लायक भीख मिलती है।

द्वार लगाना (दरवाजा बंद करना)- उसने मुझे देखते ही द्वार लगा दिया था।

दम मारना- (विश्राम करना)

दम में दम आना- (राहत होना)

दाँव खेलना- (धोखा देना)

दिनों का फेर होना- (बुरे दिन आना)

दीदे का पानी ढल जाना- (बेशर्म होना)

दिल बढ़ाना- (साहस भरना)

दूध के दाँत न टूटना- (ज्ञान और अनुभव का न होना)

दायें-बायें देखना- (सावधान होना)

दिल दरिया होना- (उदार होना)

( ध )

धज्जियाँ उड़ाना (किसी के दोषों को चुन-चुनकर गिनाना)- उसने उनलोगों की धज्जियाँ उड़ाना शुरू किया कि वे वहाँ से भाग खड़े हुए।

धूप में बाल सफेद करना (बिना अनुभव के जीवन का बहुत बड़ा भाग बिता देना)- रामू काका ने धूप में बाल सफेद नहीं किए हैं, उन्हें बहुत अनुभव है।

धोबी का कुत्ता घर का न घाट का (जिसका कहीं ठिकाना न हो, निरर्थक व्यक्ति)- जब से रामू की नौकरी छूटी है, उसकी दशा धोबी का कुत्ता घर न घाट का जैसी है।

धतूरा खाए फिरना (उन्मत्त होना)- लॉटरी खुलने पर अमित धतूरा खाए फिर रहा है।

धन्नासेठ का नाती बनना (गरीब आदमी का बहुत गर्व करना)- किशन के पास कुछ भी नहीं है, फिर भी धन्नासेठ का नातीबनता है।

घब्बा लगना (कलंकित करना)- मोहन ने चोरी करके खुद पर धब्बा लगा लिया।

धमाचौकड़ी मचाना (उपद्रव करना)- अंकुर और टीटू मिलकर बहुत धमाचौकड़ी मचाते हैं।

धुर्रे उड़ाना (बहुत अधिक मारना)- ट्रेन में लोगों ने पॉकेटमार के धुर्रे उड़ा दिए।

धूल फाँकना (मारा-मारा फिरना)- बी.ए. पास करने के बाद कालू नौकरी के लिए धूल फाँक रहा है।

धाक जमाना(रोब या दबदबा जमाना)- वह जहाँ भी जाता है वहीं अपनी धाक जमा लेता है।

धीरज बँधाना (सांत्वना देना)- सब लोगों ने धीरज बँधाने की कोशिश की पर उसके आँसू न थमे।

धुन का पक्का (लगन से काम करने वाला)- जो धुन के पक्के होते हैं वे काम पूरा करके ही छोड़ते हैं।

धुन सवार होना (लगन लगना)- अब उसे संगीत सीखने की धुन सवार हो गई है।

धूनी रमाना (साधु या विरक्त हो जाना, कहीं पर जाकर निवास करना)- हमारा क्या है? जहाँ कहीं भी धूनी रमा देंगे वहीं अपना किया बन जाएगा।

धोखा देना (ठगना)- चोर पुलिस को धोखा देकर भाग गया।

धूल चाटना (खुशामद करना)- पहले तो बहुत अकड़ रहे थे। जब पता चला कि मदन मंत्री का बेटा है तो लगे उसकी धूल चाटने।

ध्यान में न लाना (विचार न करना)- अपनी पत्नी की बातों को ध्यान में मत लाया करो वरना दुखी होते रहोगे।

ध्यान से उतरना (भूलना)- मैंने गाड़ी की चाबी कहाँ रख दी है यह मेरे ध्यान से उतर गया है।

धता बताना- (टालना, भागना)

धरती पर पाँव न रखना- (घमंडी होना)

धुँआ-सा मुँह होना- (लज्जित होना)

धूल छानना- (मारे-मारे फिरना)

धोती ढीली होना- (डर जाना)

( न )

नौ-दो ग्यारह होना (भाग जाना)- बिल्ली को देखकर चूहे नौ दो ग्यारह हो गए।

न इधर का, न उधर का (कही का नही )- कमबख्त ने न पढ़ा, न बाप की दस्तकारी सीखी; न इधर रहा, न उधर का।

नाकों डीएम करना (परेशान करना )- पिछली लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को नाकों दम कर दिया।

निन्यानबे के फेर में पड़ना (अत्यधिक धन कमाने में व्यस्त होना)- आजकल रामू सब कुछ भूलकर निन्यानबे के फेर में पड़ा हुआ है।

न घर का रहना न घाट का (दोनों तरफ से उपेक्षित होना)- पढ़ाई छोड़ कर रोहन घर का रहा न घाट का, अब वह पछताता है।

नमक हलाल करना (उपकार का बदला उतारना)- कुत्ते ने मालिक के लिए अपनी जान दे कर अपना नमक हलाल कर दिया।

नमक का हक अदा करना (बदला/ऋण चुकाना)- यदि आप मेरी मदद करेंगे तो जीवन भर मैं आपके नमक का हक अदा करता रहूँगा।

नमक-मिर्च लगाना (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)- मेरे भाई ने नमक-मिर्च लगाकर मेरी शिकायत पिता जी से कर डाली।

नमकहराम होना (अकृतज्ञ होना)- तुम जैसे नमकहराम लोगों पर कोई कैसे यकीन करेगा?

नयनों का तारा (अत्यन्त प्रिय व्यक्ति या वस्तु)- पिंटू अपने माता-पिता के नयनों का तारा है।

नस-नस ढीली होना (बहुत थक जाना)- दिन-भर घर का काम करके माँ की नस-नस ढीली हो जाती है।

नस-नस पहचानना (भलीभाँति अच्छी तरह जानना)- माता-पिता अपने बच्चों की नस-नस पहचानते हैं।

नाक में दम करना (बहुत परेशान करना)- इस बच्चे ने तो नाक में दम कर दिया है। कितना ऊधम करता है ये!

नाक में नकेल डालना (नियंत्रण में करना)- अशोक ने मैनेजर बनकर सबकी नाक में नकेल डाल दी है।

नाक ऊँची रखना (सम्मान या प्रतिष्ठा रखना)- शांति हमेशा अपनी नाक ऊँची रखती है।

नाक रगड़ना (बहुत अनुनय-विनय करना)- सुरेश को नाक रगड़ने पर भी नौकरी नहीं मिली।

नाकों चने चबाना (बहुत परेशान होना)- शिवाजी से टक्कर लेकर मुगलों को नाकों चने चबाने पड़े।

नाक का बाल होना (बहुत प्यारा होना )- इन दिनों हरीश अपने प्रधानाध्यापक की नाक का बाल बना हुआ है।

नाक रखना (इज्जत रखना)- आई० ए० एस० की परीक्षा में प्रथम आकर मेरी बेटी ने मेरी नाक रख ली।

नाक काटना (इज्जत जाना )- पोल खुलते ही सबके सामने उसकी नाक कट गयी।

नाक कटना (प्रतिष्ठा या मर्यादा नष्ट होना)- माँ ने बेटी को समझाया कि कोई ऐसा काम न करना जिससे उनकी नाक कट जाए।

नाम उछालना (बदनामी करना)- छात्रों ने बेमतलब ही संस्कृति के आचार्य जी का नाम उछाल दिया कि ये बच्चों को मारते हैं।

नाम डुबोना (प्रतिष्ठा, मर्यादा आदि खोना)- सीमा ने घर से भाग कर अपने माँ-बाप का नाम डुबो दिया।

नाव या नैया पार लगाना (सफलता या सिद्धि प्रदान करना)- ईश्वर सदा मेहनती व्यक्ति की नाव/नैया पार लगाता है।

नीला-पीला होना (बहुत क्रोध करना)- राजू के होमवर्क करके न लाने पर स्कूल में अध्यापक नीले-पीले हो रहे थे।

नंगा कर देना (असलियत प्रकट कर देना)- यदि ज्यादा बक-बक करोगे तो सबके सामने नंगा कर दूँगा।

नंगा नाच करना (खुलेआम नीच काम करना)- मुहल्ले में गुंडे नंगा नाच करते हैं और पुलिस कुछ करना ही नहीं चाहती।

नंबर दो का पैसा/रुपया (अवैध धन)- सारे नेता नंबर दो के पैसे को स्विस बैंक में जमा करने में लगे हैं।

नशा उतरना/काफूर होना (घमण्ड दूर होना)- व्यापार में घाटा होते ही सेठ जी का नशा उतर गया/काफूर हो गया।

नकेल हाथ में होना (किसी की) (सब प्रकार से अधिकार में होना)- उसकी नकेल मेरे हाथ में हैं। मेरे सामने कुछ भी नहीं कर पाएगा।

न लेना न देना (कोई संबंध न रखना)- रोहन का अपनी पत्नी से न लेना है न देना। दोनों अलग हो गए हैं।

नखरे उठाना (खुशामद करना)- मैं किसी के नखरे नहीं उठा सकता। जो मुझे उचित लगेगा वही करूँगा।

नजर अंदाज करना (उपेक्षा करना)- धनवान बच्चों के सामने गरीब बच्चों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

नजर उतारना (बुरी दृष्टि के प्रभाव को मंत्र आदि युक्ति से दूर करना)- लगता है तुम्हें लोगों की नजर लग जाती है इसलिए जल्दी-जल्दी बीमार पड़ जाती हो। इस बार किसी साधु-संत से नजर उतरवा लो।

नजर डालना (देखना)- यदि आप इस तरफ नजर डालेंगे तो आपको सब समझ में आ जाएगा।

नजरबंद करना (जेल में रखना)- गाँधी जी को अंग्रेजो ने कई बार नजरबंद करके रखा था।

नजर बचाकर (चुपके से)- माता-पिता की नजर बचाकर वह सिनेमा देखने आई थी।

नजर से गिरना (प्रतिष्ठा कम करना)- जो लोग अपने बड़ों की नजर में गिर जाते हैं उनको कोई नहीं पूछता।

नब्ज छूटना (मर जाना)- सेठजी की नब्ज छूटते ही सब लोग रोने चिल्लाने लगे।

नसीब फूटना (भाग्य का प्रतिकूल होना)- हमारे तो नसीब फूटे थे जो इस शहर में आकर बसे।

नाक के नीचे (बहुत निकट)- आपकी नाक के नीचे आपका नौकर चोरी करता रहा और आपको तब पता चला जब उसने सारा खजाना खाली कर दिया।

नानी मर जाना (बहुत कष्ट होना)- थोड़ा-सा भी काम बढ़ जाता है तो तुम्हारी नानी क्यों मर जाती हैं?

नाम कमाना (ख्याति प्राप्त करना)- कंप्यूटर के क्षेत्र में मेरे बेटे ने बहुत नाम कमाया है।

नाक भौं चढ़ाना (घृणा प्रदर्शित करना)- इस जगह को देखकर नाक-भौं मत चढ़ाओ। इतनी खराब जगह नहीं है यह।

नाक पर मक्खी न बैठने देना (अपने ऊपर किसी भी प्रकार का आक्षेप न लगने देना)- जो अपनी नाक पर मक्खी तक नहीं बैठने देता वह इस बेईमानी के धंधे में हमारी मदद करेगा, यह तो संभव ही नहीं।

नुक़्ताचीनी करना (दोष दिखाना, आलोचना करना)- तुम हर बात में नुक्ताचीनी क्यों करती हो, कोई भी बात सीधे क्यों नहीं मान लेती हो।

निछावर करना (बलिदान करना)- अनेक देशभक्तों ने देश के लिए अपनी जान निछावर कर दी।

नींद हराम करना (चिंता आदि के कारण सो न पाना)- बेटी के विवाह की चिंता में वर्मा जी की नींद हराम हो गई है।

नींव डालना (शुभ कार्य आरंभ करना)- जैसी नींव डालोगे वैसी ही इमारत खड़ी होगी। अतः बच्चों को शुरू से ऐसी शिक्षा दो कि उनकी नींव मजबूत हो।

नीचा दिखाना (अपमानित करना)- जो दूसरों को अकारण नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं एक दिन खुद गड्ढ़े में गिरते हैं।

नोंक-झोंक होना (कहा-सुनी होना)- वैसे तो इनमें गहरी दोस्ती है, पर कभी-कभी नोंक-झोंक होती रहती हैं।

नौकरी बजाना (कर्तव्यों का पालन करना)- मैं तो ईमानदारी से अपनी नौकरी बजाता हूँ, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

नौबत आना (संयोग उपस्थित होना)- अब यह नौबत आ गई है कि कोई एक गिलास पानी तक को नहीं पूछता।

नजर पर चढ़ना- (पसंद आ जाना)

नाच नचाना- (तंग करना)

नजर चुराना- (आँख चुराना)

नदी-नाव संयोग- (ऐसी भेंट/मुलाकात जो कभी इत्तिफाक से हो जाय)

नसीब चमकना- (भाग्य चमकना)

नेकी और पूछ-पूछ- (बिना कहे ही भलाई करना)

( प )

पेट काटना (अपने भोजन तक में बचत )- अपना पेट काटकर वह अपने छोटे भाई को पढ़ा रहा है।

पानी उतारना (इज्जत लेना )- भरी सभा में द्रोपदी को पानी उतारने की कोशिश की गयी।

पेट में चूहे कूदना (जोर की भूख )- पेट में चूहे कूद रहे है। पहले कुछ खा लूँ, तब तुम्हारी सुनूँगा।

पहाड़ टूट पड़ना (भारी विपत्ति आना )- उस बेचारे पर तो दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा।

पट्टी पढ़ाना (बुरी राय देना)- तुमने मेरे बेटे को कैसी पट्टी पढ़ाई कि वह घर जाता ही नहीं ?

पौ बारह होना (खूब लाभ होना)- क्या पूछना है ! आजकल तुम व्यापारियों के ही तो पौ बारह हैं।

पाँचों उँगलियाँ घी में होना (पूरे लाभ में)- पिछड़े देशों में उद्योगियों और मेहनतकशों की हालत पतली रहती है तथा दलालों, कमीशन एजेण्टों और नौकरशाहों की ही पाँचों उँगलियाँ घी में रहता हैं।

पगड़ी रखना (इज्जत बचाना)- हल्दीघाटी में झाला सरदार ने राजपूतों की पगड़ी रख ली।

पगड़ी उतारना (अपमानित करना)- दहेज-लोभियों ने सीता के पिता की पगड़ी उतार दी।

पानी-पानी होना (अधिक लज्जित होना)- जब धीरज की चोरी पकड़ी गई तो वह पानी-पानी हो गया।

पत्ता कटना (नौकरी छूटना)- मंदी के दौर में मेरी कंपनी में दस लोगों का पत्ता कट गया।

परछाई से भी डरना (बहुत डरना)- राजू तो अपने पिताजी की परछाई से भी डरता है।

पर्दाफाश करना (भेद खोलना)- महेश मुझे बात-बात पर धमकी देता है कि यदि मैं उसकी बात नहीं मानूँगा तो वह मेरा पर्दाफाश कर देगा।

पर्दाफाश होना (भेद खुलना)- रामू ने बहुत छिपाया, पर कल उसका पर्दाफाश हो ही गया।

पल्ला झाड़ना (पीछा छुड़ाना)- मैंने उसे उधार पैसे नहीं दिए तो उसने मुझसे पल्ला झाड़ लिया।

पाँव तले से धरती खिसकना (अत्यधिक घबरा जाना)- बस में जेब कटने पर मेरे पाँव तले से धरती खिसक गई।

पाँव फूलना (डर से घबरा जाना)- जब चोरी पकड़ी गई तो रामू के पाँव फूल गए।

पानी का बुलबुला (क्षणभंगुर, थोड़ी देर का)- संतों ने ठीक ही कहा है- ये जीवन पानी का बुलबुला है।

पानी फेरना (समाप्त या नष्ट कर देना)- मित्र! तुमने तो सब किये कराए पर पानी फेर दिया।

पारा उतरना (क्रोध शान्त होना)- जब मोहन को पैसे मिल गए तो उसका पारा उतर गया।

पारा चढ़ना (क्रोधित होना)- मेरे दादाजी का जरा-सी बात में पारा चढ़ आता है।

पेट का गहरा (भेद छिपाने वाला)- कल्लू पेट का गहरा है, राज की बात नहीं बताता।

पेट का हल्का (कोई बात न छिपा सकने वाला)- रामू पेट का हल्का है, उसे कोई बात बताना बेकार है।

पटरा कर देना (चौपट कर देना)- इस वर्ष के अकाल ने तो पटरा कर दिया।

पट्टी पढ़ाना (गलत सलाह देना)- किसी को पट्टी पढ़ाना अच्छी बात नहीं।

पत्थर का कलेजा (कठोर हृदय व्यक्ति)- शेरसिंह का पत्थर का कलेजा है तभी अपने माता-पिता के देहांत पर उसकी आँखों में आँसू नहीं थे।

पत्थर की लकीर (पक्की बात)- पंडित जी की बात पत्थर की लकीर है।

पर्दा उठना (भेद प्रकट होना)- आज सच्चाई से पर्दा उठ ही गया कि मुन्ना धनवान है।

पलकों पर बिठाना (बहुत अधिक आदर-स्वागत करना)- रामू ने विदेश से आए बेटों को पलकों पर बिठा लिया।

पलकें बिछाना (बहुत श्रद्धापूर्वक आदर-सत्कार करना)- नेताजी के आने पर सबने पलकें बिछा दीं।

पाँव धोकर पीना (अत्यन्त सेवा-शुश्रुषा और सत्कार करना)- रमा अपनी सासुमाँ के पाँव धोकर पीती है।

पॉकेट गरम करना (घूस देना)- अदालत में पॉकेट गर्म करने के बाद ही रामू का काम हुआ।

पीठ की खाल उधेड़ना (कड़ी सजा देना)- कक्षा में शोर मचाने पर अध्यापक ने रामू की पीठ की खाल उधेड़ दी।

पीठ ठोंकना (शाबाशी देना)- कक्षा में फर्स्ट आने पर अध्यापक ने राजू की पीठ ठोंक दी।

प्राण हथेली पर लेना (जान खतरे में डालना)- सैनिक प्राण हथेली पर लेकर देश की रक्षा करते हैं।

प्राणों पर खेलना (जान जोखिम में डालना)- आचार्य जी डूबती बच्ची को बचाने के लिए अपने प्राणों पर खेल गए।

पंख लगना (विशेष चतुराई के लक्षण प्रकट करना)- मधु के तो पंख लग गए हैं, उसे बहस में हरा पाना आसान नहीं है।

पंथ निहारना/देखना (प्रतीक्षा करना)- गोपियाँ पंथ निहारती रहीं पर कृष्ण कभी वापस न आए।

पत्ता खड़कना (आशंका होना)- अगर यहाँ पत्ता भी खड़केगा तो मुझे खबर मिल जाएगी, इसलिए आप निश्चिंत होकर अपना काम कीजिए।

पर कटना (अशक्त हो जाना)- इस लड़के के पर काटने पड़ेंगे बहुत बक-बक करने लगा है।

पलक-पाँवड़े बिछाना (बहुत श्रद्धापूर्वक स्वागत करना)- गाँधी जी जिस गाँव से भी निकल जाते थे लोग उनके स्वागत में पलक-पाँवड़े बिछा देते थे।

पलकों में रात बीतना (रातभर नींद न आना)- रात को कॉफी क्या पी, पलकों में ही सारी रात बीत गई।

पल्ला छुड़ाना (छुटकारा पाना)- मुझे इस काम में फँसाकर आप मुझसे पल्ला क्यों छुड़ाना चाहते हैं?

पल्ला पकड़ना (आश्रय लेना)- अब पल्ला पकड़ा है तो जीवनभर साथ निभाना होगा।

पसीने की कमाई (मेहनत से कमाई हुई संपत्ति)- भाई साहब! यह मेरे पसीने की कमाई है, मैं ऐसे ही नहीं लुटा सकता।

पाँव पड़ना (बहुत अनुनय-विनय करना)- मेरे पाँव पड़ने से कुछ न होगा, जाकर अपने अध्यापक से माँफी माँगो।

पाँव में बेड़ी पड़ना (स्वतंत्रता नष्ट हो जाना)- मल्लिका का विवाह क्या हुआ बेचारी के पाँवों में बेड़ी पड़ गई है, उसके सास-ससुर उसे कहीं आने-जाने ही नहीं देते।

पाँवों में मेंहदी लगना (कहीं जाने में अशक्त होना)- तुम्हारे पाँवों में क्या मेंहदी लगी है जो तुम बाजार तक जाकर सब्जी भी नहीं ला सकते?

पाँसा पलटना (भाग्य का प्रतिकूल होना)- पता नहीं कब क्या से क्या हो जाए? पाँसा पलटते देर नहीं लगती।

पानी जाना (प्रतिष्ठा नष्ट होना)- मनुष्य का यदि एक बार पानी चला जाए तो दुबारा वैसा ही सम्मान वापस नहीं मिलता।

पानी की तरह रुपया बहाना (अन्धाधुन्ध खर्च करना)- सेठजी ने सेठानी के इलाज पर पानी की तरह रुपया बहाया पर कुछ न हो सका।

पापड़ बेलना (कष्टमय जीवन बिताना, बहुत परिश्रम करना)- कितने पापड़ बेले हैं तब जाकर यह छोटी-सी नौकरी मिली है।

पाप का घड़ा भरना (पाप का पराकाष्ठा पर पहुँचना)- वह दुष्ट समझता था कि उसके पापों का घड़ा कभी भरेगा ही नहीं, पर समय किसी को नहीं छोड़ता।

पार लगाना (उद्धार करना)- ईश्वर पर भरोसा रखो। वे ही हमारी नैया पार लगाएँगे।

पाला पड़ना (वास्ता पड़ना)- मुझसे पाला पड़ा होता तो उसके होश ठिकाने आ जाते।

पासा पलटना (स्थिति उलट जाना)- क्या करें पास ही पलट गया। सोचा कुछ था हो कुछ गया।

पिंड छुड़ाना (पीछा छुड़ाना)- बड़ा दुष्ट है वह। उससे पिंड छुड़ाना बहुत मुश्किल है।

पिल पड़ना (किसी काम के पीछे बुरी तरह लग जाना)- बर्तन में रखे दूध पर बिल्लियाँ ऐसे पिल पड़ीं कि सारा दूध जमीन पर फैल गया।

पीछा छुड़ाना (जान छुड़ाना)- बड़ी मुश्किल से मैं उससे पीछा छुड़ाकर आया हूँ।

पीठ दिखाना (हारकर भागना/पीछे हटना)- पाकिस्तानी सेना पीठ दिखाकर भाग निकली।

पीस डालना (नष्ट कर देना)- जो मुझसे टक्कर लेगा उसे मैं पीस डालूँगा।

पुरजा ढीला होना (व्यक्ति का सनकी हो जाना)- मदन लाल के दिमाग का पुरजा ढीला हो गया है। उसे पता ही नहीं चलता कि क्या बोल रहा है?

पूरा न पड़ना (कमी पड़ना)- मेहमान अधिक आ गए हैं शायद इतना खाना पूरा न पड़े?

पेट पर लात मारना (रोजी ले लेना)- मैं किसी के पेट पर लात मारना नहीं चाहता वरना अब तक तो उसे नौकरी से बाहर कर दिया होता।

पेट पीठ एक होना (बहुत दुर्बल होना)- तीन माह की बीमारी में रमेश के पेट-पीठ एक हो गए हैं।

पेट में दाढ़ी होना (बहुत चालाक होना)- उसे सीधा मत समझना। उसके पेट में दाढ़ी है, किसी भी दिन चकमा दे सकता है।

पेट में बात न पचना (कोई बात छिपा न सकना)- उसे हर बात मत बताया करो क्योंकि उसके पेट में कोई बात नहीं पच ती।

पेट में बल पड़ना (इतना हँसना कि पेट दुखने लगे)- आज सब लोगों ने जो चुटकले सुनाए उन्हें सुनकर सब लोगों के पेट में बल पड़ गए।

पैंतरे बदलना (नई चाल चलना)- रामेश्वर से सावधान रहना। वह हर बार पैंतरे बदलता है।

पैर उखड़ना (भाग जाना)- युद्ध में कौरवों की सेना के पैर उखड़ गए।

पैर न टिकना (कहीं स्थायी रूप से कुछ समय भी न रहना)- तुम्हारा कभी पैर क्यों नहीं टिकता?

पैर फैलाकर सोना (निश्चिंत रहना)- बेटी का विवाह हो जाए फिर पैर फैला कर सोऊँगा।

पोल खुलना (किसी का छुपा हुआ दोष सामने आ जाना)- जब तुम्हारी पोल खुल जाएगी तब ये ही लोग तुम्हारा क्या हाल करेंगे तुम्हें अनुमान नहीं है।

पौ फटना (प्रातः काल होना)- पौ फटते ही पिता जी घर से निकल पड़े।

प्रशंसा के पुल बाँधना (बहुत तारीफ करना)- आज तो समारोह में सभाध्यक्ष ने शर्मा जी की प्रशंसा के पुल बाँध दिए।

प्राणों की बाजी लगाना (जान की परवाह न करना)- चिंता मत करो। प्राणों की बाजी लगाकर वह तुम्हारी रक्षा करेगा।

प्राण सूखना (बहुत घबरा जाना)- जंगल में शेर की आवाज सुनते ही हमलोगों के प्राण सूख गए।

प्राण हरना (मार डालना)- शेर ने एक ही झपट्टे में बेचारे हिरण के प्राण हर लिया।

पहलू बचाना- (कतराकर निकल जाना)

पते की कहना- (रहस्य या चुभती हुई काम की बात कहना)

पानी का बुलबुला- (क्षणभंगुर वस्तु)

पानी देना- (तर्पण करना, सींचना)

पानी न माँगना- (तत्काल मर जाना)

पानी पर नींव डालना- (ऐसी वस्तु को आधार बनाना जो टिकाऊ न हो)

पानी पीकर जाति पूछना- (कोई काम कर चुकने के बाद उसके औचित्य का निर्णय करना)

पानी रखना- (मर्यादा की रक्षा करना)

पानी में आग लगाना- (असंभव कार्य करना)

पानी लगना (कहीं का)- (स्थान विशेष के बुरे वातावरण का असर होना )

पानी करना- (सरल कर देना)

पानी फिर जाना- (बर्बाद होना)

पोल खुलना- (रहस्य प्रकट करना)

पुरानी लकीर का फकीर होना/पुरानी लकीर पीटना- (पुरानी चाल मानना)

पैर पकड़ना- (क्षमा चाहना)