Muhavare(Idioms)(मुहावरे)


( त )

तूती बोलना (बोलबाला होना)- आजकल तो राहुल गाँधी की तूती बोल रही है।

तारे गिनना (चिंता के कारण रात में नींद न आना)- अपने पुत्र की चिन्ता में पिता रात भर तारे गिनते रहे।

तिल का ताड़ बनाना (छोटी-सी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना)- शांति तो तिल का ताड़ बनाने में माहिर है।

तीन तेरह करना (नष्ट करना, तितर बितर करना)- जरा-से झगड़े ने दोनों भाइयों को तीन तेरह कर दिया।

तकदीर खुलना या चमकना (भाग्य अनुकूल होना)- सरकारी नौकरी लगने से श्याम की तो तकदीर खुल गई।

तख्ता पलटना (एक शासक द्वारा दूसरे शासक को हटाकर उसके सिंहासन पर खुद बैठना)- पाकिस्तान में मुशर्रफ ने तख्ता पलट दिया और कोई कुछ न कर सका।

तलवा या तलवे चाटना (खुशामद या चापलूसी करना)- ओमवीर ने अफसरों के तलवे चाटकर ही तरक्की पाई है।

तलवे धोकर पीना (अत्यधिक आदर-सत्कार या सेवा करना)- अमन अपने माता-पिता के तलवे धोकर पीता है तभी लोग उसे श्रवण का अवतार कहते हैं।

तलवार की धार पर चलना (बहुत कठिन कार्य करना)- मित्रता निभाना तलवार की धार पर चलने के समान है।

तलवार के घाट उतारना (तलवार से मारना)- राजवीर ने अपने शत्रु को तलवार के घाट उतार दिया।

तलवार सिर पर लटकना (खतरा होना)- आजकल रामू के मैनेजर से उसकी कहासुनी हो गई है इसलिए तलवार उसके सिर पर लटकी हुई है।

तवे-सा मुँह (बहुत काला चेहरा)- किरण का तो तवे-सा मुँह है, फिर भी वह स्वयं को सुंदर समझती है।

तशरीफ लाना (आना)- घर में मेहमान आते हैं तो यही कहते हैं- तशरीफ लाइए।

तांत-सा होना (दुबला-पतला होना)- चार दिन की बीमारी में गौरव तांत-सा हो गया है।

ताक पर धरना (व्यर्थ समझकर दूर हटाना)- सारे नियम ताक पर रखकर अध्यापक ने एक छात्र को नकल करवाई।

ताक में बैठना (मौके की तलाश में रहना)- सुधीर बहुत दिनों से ताक में बैठा था कि उसे मैं कब अकेला मिलूँ और वो मुझे पीटे।

तारीफ के पुल बाँधना (अधिक प्रशंसा या तारीफ करना)- राकेश जब फर्स्ट क्लास पास हुआ तो सभी ने उसकी तारीफ के पुल बाँध दिए।

तारे तोड़ लाना (कठिन या असंभव कार्य करना)- जब विवेक ने अपनी डींग मारनी शुरू की तो मैंने कहा- बस करो भाई! तारे नहीं तोड़ लाए हो, जो इतनी डींग मार रहे हो।

तिनके का सहारा (थोड़ी-सी मदद)- मैंने मोहित की जब सौ रुपए की मदद की तो उसने कहा कि डूबते को तिनके का सहारा बहुत होता है।

तीन-पाँच करना (हर बात में आपत्ति करना)- राघव बहुत तीन-पाँच करता है इसलिए सब उससे दूर रहते हैं।

तीर मार लेना (कोई बड़ा काम कर लेना)- इंजीनियर बनकर आयुष ने तीर मार लिया है।

तीस मारखाँ बनना (अपने को बहुत शूरवीर समझना)- मुन्ना खुद को बहुत तीस मारखाँ समझता है, जब देखो लड़ाई की बातें करता रहता है।

तूफान उठना (उपद्रव खड़ा करना)- मित्र, तुम जहाँ भी जाते हो, वहीं तूफान खड़ा कर देते हो।

तेल निकालना (खूब कस कर काम लेना)- प्राइवेट फर्म तो कर्मचारी का तेल निकाल लेती है। तभी विकास को नौकरी करना पसंद नहीं है।

तेली का बैल (हर समय काम में लगा रहने वाला व्यक्ति)- प्रेमचन्द्र तो तेली का बैल है, जब देखो, रात-दिन काम करता रहता है।

तोता पालना (किसी बुरी आदत को न छोड़ना)- केशव ने तंबाकू खाने का तोता पाल लिया है। बहुत मना किया, मानता ही नहीं है।

तह देना- (दवा देना)

तह-पर-तह देना- (खूब खाना)

तरह देना- (ख्याल न करना)

तंग करना- (हैरान करना)

तंग हाथ होना- (निर्धन होना)

तिनके को पहाड़ करना- (छोटी बात को बड़ी बनाना)

ताड़ जाना- (समझ जाना)

तुक में तुक मिलाना- (खुशामद करना)

तेवर बदलना- (क्रोध करना)

ताना मारना-(व्यंग्य वचन बोलना)

ताक में रहना- (खोज में रहना)

तोते की तरह आँखें फेरना- (बेमुरौवत होना)

( थ )

थूक कर चाटना (कह कर मुकर जाना)- कल मुन्ना थूक कर चाट गया। अब उस पर कोई विश्वास नहीं करेगा।

थाली का बैंगन होना (ऐसा आदमी जिसका कोई सिद्धान्त न हो)- आजकल के नए-नए नेता तो थाली के बैंगन हैं।

थाह मिलना या लगना (भेद खुलना)- अब वैज्ञानिकों ने थाह लगा ली है कि मंगल ग्रह पर भी पानी है।

थुक्का फजीहत होना (अपमान होना)- कुमार थुक्का फजीहत होने से पहले ही चला गया।

थुड़ी-थुड़ी होना (बदनामी होना)- बच्चों को बेवजह पीटने पर अध्यापक की हर जगह थुड़ी-थुड़ी हो रही है।

थू-थू करना- (घृणा प्रकट करना)

( द )

दम टूटना (मर जाना )- शेर ने एक ही गोली में दम तोड़ दिया।

दिन दूना रात चौगुना (तेजी से तरक्की करना)- रामदास अपने व्यापार में दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहा है।

दाल में काला होना (संदेह होना )- हम लोगों की ओट में ये जिस तरह धीरे-धीरे बातें कर रहें है, उससे मुझे दाल में काला लग रहा है।

दौड़-धूप करना (बड़ी कोशिश करना)- कौन बाप अपनी बेटी के ब्याह के लिए दौड़-धूप नहीं करता ?

दो कौड़ी का आदमी (तुच्छ या अविश्र्वसनीय व्यक्ति)- किस दो कौड़ी के आदमी की बात करते हो ?

दो टूक बात कहना (थोड़े शब्दों में स्पष्ट बात कहना)- दो टूक बात कहना अच्छा रहता है।

दो दिन का मेहमान (जल्द मरनेवाला)- किसी का क्या बिगाड़ेगा ? वह बेचारा खुद दो दिन का मेहमान है।

दूध के दाँत न टूटना (ज्ञानहीन या अनुभवहीन)- वह सभा में क्या बोलेगा ? अभी तो उसके दूध के दाँत भी नहीं टूटे हैं।

दूध का दूध और पानी का पानी कर देना (पूरा-पूरा इन्साफ करना)- कल सरपंच ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।

दूज का चाँद होना या ईद का चाँद होना (कभी-कभार दिखाई पड़ना)- मित्र, आजकल तो तुम दूज का चाँद हो रहे हो।

दो नावों पर पैर रखना/दो नावों पर सवार होना (दो काम एक साथ करना)- मित्र, तुम दो नावों पर पैर मत रखो- या तो पढ़ लो, या नौकरी कर लो।

दम खींचना या साधना (चुप रह जाना)- पैसा उधार मांगने पर सेठजीदम साध गए।

दमड़ी के तीन होना (बहुत तुच्छ या सस्ता होना)- आजकल मूली दमड़ी की तीन बिक रही हैं।

दरवाजे की मिट्टी खोद डालना (बार-बार तकाजा करना)- सौ रुपए के लिए श्याम ने राजू के दरवाजे की मिट्टी खोद डाली।

दरार पड़ना (मतभेद पैदा होना)- अब कौशल और कौशिक की दोस्ती में दरार पड़ गई है।

दसों उंगलियाँ घी में होना (खूब लाभ होना)- आजकल रामअवतार की दसों उंगलियाँ घी में हैं।

दाँत पीसना (बहुत क्रोधित होना)- रमेश तो बात-बात पर दाँत पीसने लगता है।

दाँत काटी रोटी होना (अत्यन्त घनिष्ठता होना या मित्रता होना)- आजकल राम और श्याम की दाँत काटी रोटी है।

दाँत खट्टे करना (परास्त करना, हराना)- महाभारत में पांडवों ने कौरवों के दाँत खट्टे कर दिए थे।

दाँतों तले उँगली दबाना (दंग रह जाना)- जब एक गरीब छात्र ने आई.ए.एस. पास कर ली तो सब दाँतों तले उँगली दबाने लगे।

दाई से पेट छिपाना (जानने वाले से भेद छिपाना)- मैं पंकज की हरकत जानता हूँ, फिर भी वह दाई से पेट छिपा रहा था।

दाद देना (प्रशंसा करना)- माहेश्वरी सर के पढ़ाने के ढँग की सभी छात्र दाद देते हैं।

दाना-पानी उठना (आजीविका का साधन खत्म होना या बेरोजगार होना)- लगता है आज रोहित का दाना-पानी उठ गया है। तभी वह मैनेजर को उल्टा जवाब दे रहा है।

दाल-भात में मूसलचन्द (दो व्यक्तियों की बातों में तीसरे व्यक्ति का हस्तक्षेप करना)- शंकर हर जगह दाल-भात में मूसलचन्द की तरह आ जाता है।

दिन में तारे दिखाई देना (अधिक दुःख के कारण होश ठिकाने न रहना)- जब रामू की नौकरी छूट गई तो उसे दिन में तारे दिखाई दे गए।

दिन गँवाना (समय नष्ट करना)- बेरोजगारी में रोहन आजकल यूँ ही दिन गँवा रहा है।

दिन पूरे होना (अंतिम समय आना)- लगता है किशन के दिन पूरे हो गए हैं तभी अत्यधिक धूम्रपान कर रहा है।

दिन पलटना (अच्छे दिन आना)- नौकरी लगने के बाद अब शम्भू के दिन पलट गए हैं।

दिन-रात एक करना (कठिन श्रम करना)- मोहन ने दसवीं पास करने के लिए दिन-रात एक कर दिया था।

दिमाग दौड़ाना (विचार करना, अत्यधिक सोचना)- कमल बहुत दिमाग दौड़ाता है तभी वह इंजीनियर बन पाया है।

दिमाग सातवें आसमान पर होना (बहुत अधिक घमंड होना)- सरकारी नौकरी लगने पर परमजीत का दिमाग सातवें आसमान पर हो गया है।

दिमाग खाना या खाली करना (मगजपच्ची या बकवास करना)- मेरे दिमाग खाली करने के बाद भी गणित का सवाल सोनू की समझ में नहीं आया।

दिल टुकड़े-टुकड़े होना या दिल टूटना (बहुत निराश होना)- जब मनीष को मैंने किताब नहीं दी तो उसका दिल टुकड़े-टुकड़े हो गया।

दिल पर पत्थर रखना (दुःख सहकर या हानि होने पर चुप रहना)- रामू के जब पाँच हजार रुपए खो गए तो उसने दिल पर पत्थर रख लिया।

दिल पसीजना (किसी पर दया आना)- भिखारी की दुर्दशा देखकर मेरा दिल पसीज गया।

दिल हिलना (अत्यधिक भयभीत होना)- रात में किसी की परछाई देखकर मेरा दिल हिल गया।

दिल का काला या खोटा (कपटी अथवा दुष्ट)- मुन्ना दिल का काला है।

दिल बाग-बाग होना (अत्यधिक हर्ष होना)- वर्षों बाद बेटा घर आया तो माता-पिता का दिल बाग-बाग हो गया।

दिल्ली दूर होना (लक्ष्य दूर होना)- अभी तो मोहन ने सिर्फ दसवीं पास की है। उसे डॉक्टर बनना है तो अभी दिल्ली दूर है।

दुनिया की हवा लगना (कुमार्ग पर चलना)- रामू को दुनिया की हवा लग गई है, पहले तो वह बहुत सीधा था।

दुनिया से उठ जाना (मर जाना)- काका हाथरसी दुनिया से उठ गए तो संगीत प्रेमी रोने लगे थे।

दूध का धुला (निष्पाप; निर्दोष)- मुकेश तो दूध का धुला है, लोग उसे चोरी के इल्जाम में खाहमखाह फँसा रहे हैं।

दूध का-सा उबाल आना (एकदम से क्रोध आना)- जैसे ही मैंने पिताजी से रुपए माँगे, उनमें दूध का-सा उबाल आ गया।

दूध की नदियाँ बहना (धन-दौलत से पूर्ण होना)- कृष्ण के युग में मथुरा में दूध की नदियाँ बहती थीं।

दूध की मक्खी (तुच्छ व्यक्ति)- बेरोजगार होने के बाद रामू तो अपने घर में दूध की मक्खी की तरह है।

दूध में से मक्खी की तरह निकालकर फेंकना (अनावश्यक समझकर अलग कर देना)- राजू की कंपनी ने कल उसे दूध में से मक्खी की तरह निकालकर फ़ेंक दिया।

दो-दो हाथ होना (लड़ाई होना)- छोटी-सी बात पर राजू और रामू में दो-दो हाथ हो गए।

दोनों हाथों में लड्डू होना (हर प्रकार से लाभ होना)- अब अजय के तो दोनों हाथों में लड्डू हैं।

दोनों हाथों से लुटाना (खूब खर्च करना)- सुरेश बाप-दादों की संपत्ति दोनों हाथों से लुटा रहा है।

दूर के ढोल सुहावने होना या लगना (दूर की वस्तु या व्यक्ति अच्छा लगना)- जब मैंने वैष्णो देवी जाने को कहा तो पिताजी बोले कि तुम्हें दूर के ढोल सुहावने लग रहे हैं, चढ़ाई चढ़ोगे तब मालूम पड़ेगा।

देवलोक सिधारना (मर जाना)- रामू के पिताजी तो बहुत पहले देवलोक सिधार गए, पर मुझे आज ही ज्ञात हुआ है।

दम मारना- (विश्राम करना)

दम में दम आना- (राहत होना)

दाल गलना- (कामयाब होना, प्रयोजन सिद्ध होना)

दाँव खेलना- (धोखा देना)

दिनों का फेर होना- (बुरे दिन आना)

दीदे का पानी ढल जाना- (बेशर्म होना)

दिल बढ़ाना- (साहस भरना)

दुकान बढ़ाना- (दूकान बंद करना)

दूध के दाँत न टूटना- (ज्ञान और अनुभव का न होना)

दायें-बायें देखना- (सावधान होना)

दिल दरिया होना- (उदार होना)

( ध )

धज्जियाँ उड़ाना (किसी के दोषों को चुन-चुनकर गिनाना)- उसने उनलोगों की धज्जियाँ उड़ाना शुरू किया कि वे वहाँ से भाग खड़े हुए।

धूप में बाल सफेद करना (बिना अनुभव के जीवन का बहुत बड़ा भाग बिता देना)- रामू काका ने धूप में बाल सफेद नहीं किए हैं, उन्हें बहुत अनुभव है।

धोबी का कुत्ता घर का न घाट का (जिसका कहीं ठिकाना न हो, निरर्थक व्यक्ति)- जब से रामू की नौकरी छूटी है, उसकी दशा धोबी का कुत्ता घर न घाट का जैसी है।

धतूरा खाए फिरना (उन्मत्त होना)- लॉटरी खुलने पर अमित धतूरा खाए फिर रहा है।

धन्नासेठ का नाती बनना (गरीब आदमी का बहुत गर्व करना)- किशन के पास कुछ भी नहीं है, फिर भी धन्नासेठ का नातीबनता है।

घब्बा लगना (कलंकित करना)- मोहन ने चोरी करके खुद पर धब्बा लगा लिया।

धमाचौकड़ी मचाना (उपद्रव करना)- अंकुर और टीटू मिलकर बहुत धमाचौकड़ी मचाते हैं।

धुर्रे उड़ाना (बहुत अधिक मारना)- ट्रेन में लोगों ने पॉकेटमार के धुर्रे उड़ा दिए।

धूल फाँकना (मारा-मारा फिरना)- बी.ए. पास करने के बाद कालू नौकरी के लिए धूल फाँक रहा है।

धता बताना- (टालना, भागना)

धरती पर पाँव न रखना- (घमंडी होना)

धाक जमाना- (रोब होना)

धुँआ-सा मुँह होना- (लज्जित होना)

धूल छानना- (मारे-मारे फिरना)

धोती ढीली होना- (डर जाना)

( न )

नौ-दो ग्यारह होना (भाग जाना)- बिल्ली को देखकर चूहे नौ दो ग्यारह हो गए।

न इधर का, न उधर का (कही का नही )- कमबख्त ने न पढ़ा, न बाप की दस्तकारी सीखी; न इधर रहा, न उधर का।

नाक का बल होना (बहुत प्यारा होना )- इन दिनों हरीश अपने प्रधानाध्यापक की नाक का बल बना हुआ है।

नाकों डीएम करना (परेशान करना )- पिछली लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को नाकों दम कर दिया।

नाक काटना (इज्जत जाना )- पोल खुलते ही सबके सामने उसकी नाक कट गयी।

निन्यानबे के फेर में पड़ना (अत्यधिक धन कमाने में व्यस्त होना)- आजकल रामू सब कुछ भूलकर निन्यानबे के फेर में पड़ा हुआ है।

न घर का रहना न घाट का (दोनों तरफ से उपेक्षित होना)- पढ़ाई छोड़ कर रोहन घर का रहा न घाट का, अब वह पछताता है।

नमक हलाल करना (उपकार का बदला उतारना)- कुत्ते ने मालिक के लिए अपनी जान दे कर अपना नमक हलाल कर दिया।

नयनों का तारा (अत्यन्त प्रिय व्यक्ति या वस्तु)- पिंटू अपने माता-पिता के नयनों का तारा है।

नस-नस ढीली होना (बहुत थक जाना)- दिन-भर घर का काम करके माँ की नस-नस ढीली हो जाती है।

नस-नस पहचानना (भलीभाँति अच्छी तरह जानना)- माता-पिता अपने बच्चों की नस-नस पहचानते हैं।

नाक में दम करना (बहुत परेशान करना)- इस बच्चे ने तो नाक में दम कर दिया है। कितना ऊधम करता है ये!

नाक में नकेल डालना (नियंत्रण में करना)- अशोक ने मैनेजर बनकर सबकी नाक में नकेल डाल दी है।

नाक ऊँची रखना (सम्मान या प्रतिष्ठा रखना)- शांति हमेशा अपनी नाक ऊँची रखती है।

नाक कटना (प्रतिष्ठा या मर्यादा नष्ट होना)- माँ ने बेटी को समझाया कि कोई ऐसा काम न करना जिससे उनकी नाक कट जाए।

नाक रगड़ना (बहुत अनुनय-विनय करना)- सुरेश को नाक रगड़ने पर भी नौकरी नहीं मिली।

नाकों चने चबाना (बहुत परेशान होना)- शिवाजी से टक्कर लेकर मुगलों को नाकों चने चबाने पड़े।

नाम उछालना (बदनामी करना)- छात्रों ने बेमतलब ही संस्कृति के आचार्य जी का नाम उछाल दिया कि ये बच्चों को मारते हैं।

नाम डुबोना (प्रतिष्ठा, मर्यादा आदि खोना)- सीमा ने घर से भाग कर अपने माँ-बाप का नाम डुबो दिया।

नाव या नैया पार लगाना (सफलता या सिद्धि प्रदान करना)- ईश्वर सदा मेहनती व्यक्ति की नाव/नैया पार लगाता है।

नीला-पीला होना (बहुत क्रोध करना)- राजू के होमवर्क करके न लाने पर स्कूल में अध्यापक नीले-पीले हो रहे थे।

नजर पर चढ़ना- (पसंद आ जाना)

नाच नचाना- (तंग करना)

नुक़्ताचीनी करना- (दोष दिखाना, आलोचना करना)

नजर चुराना- (आँख चुराना)

नमक अदा करना- (फर्ज पूरा करना, प्रत्युपकार करना)

नमक-मिर्चा लगाना- (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)

नशा उतरना- (घमण्ड उतरना)

नदी-नाव संयोग- (ऐसी भेंट/मुलाकात जो कभी इत्तिफाक से हो जाय)

नसीब चमकना- (भाग्य चमकना)

नींद हराम होना- (तंग आना, सो न सकना)

नेकी और पूछ-पूछ- (बिना कहे ही भलाई करना)

( प )

पेट काटना (अपने भोजन तक में बचत )- अपना पेट काटकर वह अपने छोटे भाई को पढ़ा रहा है।

पानी उतारना (इज्जत लेना )- भरी सभा में द्रोपदी को पानी उतारने की कोशिश की गयी।

पेट में चूहे कूदना (जोर की भूख )- पेट में चूहे कूद रहे है। पहले कुछ खा लूँ, तब तुम्हारी सुनूँगा।

पहाड़ टूट पड़ना (भारी विपत्ति आना )- उस बेचारे पर तो दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा।

पट्टी पढ़ाना (बुरी राय देना)- तुमने मेरे बेटे को कैसी पट्टी पढ़ाई कि वह घर जाता ही नहीं ?

पौ बारह होना (खूब लाभ होना)- क्या पूछना है ! आजकल तुम व्यापारियों के ही तो पौ बारह हैं।

पाँचों उँगलियाँ घी में होना (पूरे लाभ में)- पिछड़े देशों में उद्योगियों और मेहनतकशों की हालत पतली रहती है तथा दलालों, कमीशन एजेण्टों और नौकरशाहों की ही पाँचों उँगलियाँ घी में रहता हैं।

पगड़ी रखना (इज्जत बचाना)- हल्दीघाटी में झाला सरदार ने राजपूतों की पगड़ी रख ली।

पगड़ी उतारना (अपमानित करना)- दहेज-लोभियों ने सीता के पिता की पगड़ी उतार दी।

पानी-पानी होना (अधिक लज्जित होना)- जब धीरज की चोरी पकड़ी गई तो वह पानी-पानी हो गया।

पत्ता कटना (नौकरी छूटना)- मंदी के दौर में मेरी कंपनी में दस लोगों का पत्ता कट गया।

परछाई से भी डरना (बहुत डरना)- राजू तो अपने पिताजी की परछाई से भी डरता है।

पर्दाफाश करना (भेद खोलना)- महेश मुझे बात-बात पर धमकी देता है कि यदि मैं उसकी बात नहीं मानूँगा तो वह मेरा पर्दाफाश कर देगा।

पर्दाफाश होना (भेद खुलना)- रामू ने बहुत छिपाया, पर कल उसका पर्दाफाश हो ही गया।

पल्ला झाड़ना (पीछा छुड़ाना)- मैंने उसे उधार पैसे नहीं दिए तो उसने मुझसे पल्ला झाड़ लिया।

पाँव तले से धरती खिसकना (अत्यधिक घबरा जाना)- बस में जेब कटने पर मेरे पाँव तले से धरती खिसक गई।

पाँव फूलना (डर से घबरा जाना)- जब चोरी पकड़ी गई तो रामू के पाँव फूल गए।

पानी का बुलबुला (क्षणभंगुर, थोड़ी देर का)- संतों ने ठीक ही कहा है- ये जीवन पानी का बुलबुला है।

पानी फेरना (समाप्त या नष्ट कर देना)- मित्र! तुमने तो सब किये कराए पर पानी फेर दिया।

पारा उतरना (क्रोध शान्त होना)- जब मोहन को पैसे मिल गए तो उसका पारा उतर गया।

पारा चढ़ना (क्रोधित होना)- मेरे दादाजी का जरा-सी बात में पारा चढ़ आता है।

पेट का गहरा (भेद छिपाने वाला)- कल्लू पेट का गहरा है, राज की बात नहीं बताता।

पेट का हल्का (कोई बात न छिपा सकने वाला)- रामू पेट का हल्का है, उसे कोई बात बताना बेकार है।

पटरा कर देना (चौपट कर देना)- इस वर्ष के अकाल ने तो पटरा कर दिया।

पट्टी पढ़ाना (गलत सलाह देना)- किसी को पट्टी पढ़ाना अच्छी बात नहीं।

पत्थर का कलेजा (कठोर हृदय व्यक्ति)- शेरसिंह का पत्थर का कलेजा है तभी अपने माता-पिता के देहांत पर उसकी आँखों में आँसू नहीं थे।

पत्थर की लकीर (पक्की बात)- पंडित जी की बात पत्थर की लकीर है।

पर्दा उठना (भेद प्रकट होना)- आज सच्चाई से पर्दा उठ ही गया कि मुन्ना धनवान है।

पलकों पर बिठाना (बहुत अधिक आदर-स्वागत करना)- रामू ने विदेश से आए बेटों को पलकों पर बिठा लिया।

पलकें बिछाना (बहुत श्रद्धापूर्वक आदर-सत्कार करना)- नेताजी के आने पर सबने पलकें बिछा दीं।

पाँव धोकर पीना (अत्यन्त सेवा-शुश्रुषा और सत्कार करना)- रमा अपनी सासुमाँ के पाँव धोकर पीती है।

पॉकेट गरम करना (घूस देना)- अदालत में पॉकेट गर्म करने के बाद ही रामू का काम हुआ।

पीठ की खाल उधेड़ना (कड़ी सजा देना)- कक्षा में शोर मचाने पर अध्यापक ने रामू की पीठ की खाल उधेड़ दी।

पीठ ठोंकना (शाबाशी देना)- कक्षा में फर्स्ट आने पर अध्यापक ने राजू की पीठ ठोंक दी।

प्राण हथेली पर लेना (जान खतरे में डालना)- सैनिक प्राण हथेली पर लेकर देश की रक्षा करते हैं।

प्राणों पर खेलना (जान जोखिम में डालना)- आचार्य जी डूबती बच्ची को बचाने के लिए अपने प्राणों पर खेल गए।

पहलू बचाना- (कतराकर निकल जाना)

पते की कहना- (रहस्य या चुभती हुई काम की बात कहना)

पानी का बुलबुला- (क्षणभंगुर वस्तु)

पानी देना- (तर्पण करना, सींचना)

पानी न माँगना- (तत्काल मर जाना)

पानी पर नींव डालना- (ऐसी वस्तु को आधार बनाना जो टिकाऊ न हो)

पानी-पानी करना- (लज्जित करना)

पानी पीकर जाति पूछना- (कोई काम कर चुकने के बाद उसके औचित्य का निर्णय करना)

पानी रखना- (मर्यादा की रक्षा करना)

पानी में आग लगाना- (असंभव कार्य करना)

पानी लगना (कहीं का)- (स्थान विशेष के बुरे वातावरण का असर होना )

पानी करना- (सरल कर देना)

पानी लेना- (अप्रतिष्ठित करना)

पानी की तरह बहना- (अन्धाधुन्ध करना)

पानी फिर जाना- (बर्बाद होना)

पापड़ बेलना- (दुःख से दिन काटना)

पोल खुलना- (रहस्य प्रकट करना)

पुरानी लकीर का फकीर होना/पुरानी लकीर पीटना- (पुरानी चाल मानना)

पैर पकड़ना- (क्षमा चाहना)

पीठ दिखलाना- (पलायन)