Muhavare(Idioms)( मुहावरे)


मुहावरे (Idioms)

( च )

चल बसना (मर जाना)- बेचारे का बेटा भरी जवानी में चल बसा।

चार चाँद लगाना (चौगुनी शोभा देना)- निबन्धों में मुहावरों का प्रयोग करने से चार चाँद लग जाता है।

चिकना घड़ा होना (बेशर्म होना)- तुम ऐसा चिकना घड़ा हो तुम्हारे ऊपर कहने सुनने का कोई असर नहीं पड़ता।

चिराग तले अँधेरा (पण्डित के घर में घोर मूर्खता आचरण )- पण्डितजी स्वयं तो बड़े विद्वान है, किन्तु उनके लड़के को चिराग तले अँधेरा ही जानो।

चैन की बंशी बजाना (मौज करना)- आजकल राम चैन की बंशी बजा रहा है।

चार दिन की चाँदनी (थोड़े दिन का सुख)- राजा बलि का सारा बल भी जब चार दिन की चाँदनी ही रहा, तो तुम किस खेत की मूली हो ?

चींटी के पर लगना या जमना (विनाश के लक्षण प्रकट होना)- इसे चींटी के पर जमना ही कहेंगे कि अवतारी राम से रावण बुरी तरह पेश आया।

चूँ न करना (सह जाना, जवाब न देना)- वह जीवनभर सारे दुःख सहता रहा, पर चूँ तक न की।

चादर से बाहर पैर पसारना (आय से अधिक व्यय करना)- डेढ़ सौ ही कमाते हो और इतनी खर्चीली लतें पाल रखी है। चादर के बाहर पैर पसारना कौन-सी अक्लमन्दी है ?

चाँद पर थूकना (व्यर्थ निन्दा या सम्माननीय का अनादर करना)- जिस भलेमानस ने कभी किसी का कुछ नहीं बिगाड़ा, उसे ही तुम बुरा-भला कह रहे हो ?भला, चाँद पर भी थूका जाता है ?

चूड़ियाँ पहनना (स्त्री की-सी असमर्थता प्रकट करना)- इतने अपमान पर भी चुप बैठे हो! चूड़ियाँ तो नहीं पहन रखी है तुमने ?

चहरे पर हवाइयाँ उड़ना (डरना, घबराना)- साम्यवाद का नाम सुनते ही पूँजीपतियों के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगती है।

चाँदी काटना (खूब आमदनी करना)- कार्यालय में बाबू लोग खूब चाँदी काट रहे है।

चलता-पुर्जा- (काफी चालाक)

चाँद का टुकड़ा- (बहुत सुन्दर)

चल निकलना- (प्रगति करना, बढ़ना)

चिकने घड़े पर पानी पड़ना- (उपदेश का कोई प्रभाव न पड़ना)

चोली-दामन का साथ- (काफी घनिष्ठता)

चुनौती देना- (ललकारना)

चुल्लू भर पानी में डूब मरना- (अत्यन्त लज्जित होना)

चैन की वंशी बजाना- (सुख से समय बिताना)

चोटी का पसीना एँड़ी तक बहना- (खूब परिश्रम करना)

चण्डूखाने की गप- (झूठी गप)

चम्पत हो जाना- (भाग जाना)

चींटी के पर जमना- (ऐसा काम करना जिससे हानि या मृत्यु हो

चकमा देना- (धोखा देना)

चाचा बनाना- (दण्ड देना)

चरबी छाना- (घमण्ड होना)

चाँदी का जूता- (रूपये का जोर)

( छ )

छक्के छूटना (बुरी तरह पराजित होना)- महाराजकुमार विजयनगरम की विकेट-कीपरी में अच्छे-अच्छे बॉलर के छक्के छूट चुके है।

छप्पर फाडकर देना (बिना मेहनत का अधिक धन पाना)- ईश्वर जिसे देता है, उसे छप्पर फाड़कर देता है।

छाती पर पत्थर रखना (कठोर ह्रदय)- उसने छाती पर पत्थर रखकर अपने पुत्र को विदेश भेजा था।

छाती पर सवार होना (आ जाना)- अभी वह बात कर रही थी कि बच्चे उसके छाती पर सवार हो गए।

छक्के छुड़ाना- (खूब परेशान करना)

छठी का दूध याद करना- (सुख भूल जाना)

छाती पर मूँग या कोदो दलना- (कष्ट देना)

छः पाँच करना- (आनाकानी करना)

छाती पर साँप लोटना- (किसी के प्रति डाह)

छोटी मुँह बड़ी बात- (योग्यता से बढ़कर बोलना)

( ज, झ )

जहर उगलना (द्वेषपूर्ण बात करना )- पडोसी देश चीन और पाकिस्तान हमारे देश के प्रति हमेशा जहर उगलते रहते है।

जलती आग में घी डालना (क्रोध बढ़ाना)- बहन ने भाई की शिकायत करके जलती आग में भी डाल दिया।

जमीन आसमान एक करना (बहुत प्रयन्त करना)- मै शहर में अच्छा मकान लेने के लिए जमीन आसमान एक कर दे रहा हूँ परन्तु सफलता नहीं मिल रही है।

जान पर खेलना (साहसिक कार्य )- हम जान पर खेलकर भी अपने देश की रक्षा करेंगे।

जूते चाटना (चापलूसी करना )- अफसरों के जूते चाटते -चाटते वह थक गया ,मगर कोई फल न निकला।

जड़ उखाड़ना- (पूर्ण नाश करना)

जंगल में मंगल करना- (शून्य स्थान को भी आनन्दमय कर देना)

जबान में लगाम न होना- (बिना सोचे-समझे बोलना)

जी का जंजाल होना- (अच्छा न लगना)

जमीन का पैरों तले से निकल जाना- (सन्नाटे में आना)

जमीन चूमने लगा- (धराशायी होना)

जान खाना- (तंग करना)

जी टूटना- (दिल टूटना)

जी लगना- (मन लगना)

जी खट्टा होना- (खराब अनुभव होना)

जीती मक्खी निगलना- (जान-बूझकर बेईमानी या कोई अशोभनीय कार्य करना)

जी चुराना- (कोशिश न करना)

झाड़ मारना- (घृणा करना)

झक मारना (विवश होना)- दूसरा कोई साधन नहीं हैै। झक मारकर तुम्हे साइकिल से जाना पड़ेगा।

( ट )

टाँग अड़ाना (अड़चन डालना)- हर बात में टाँग ही अड़ाते हो या कुछ आता भी है तुम्हे ?

टका सा जबाब देना ( साफ़ इनकार करना)- मै नौकरी के लिए मैनेज़र से मिला लेकिन उन्होंने टका सा जबाब दे दिया।

टस से मस न होना ( कुछ भी प्रभाव न पड़ना)- दवा लाने के लिए मै घंटों से कह रहा हूँ, परन्तु आप आप टस से मस नहीं हो रहे हैं।

टोपी उछालना (अपमान करना)- अपने घर को देखो ,दूसरों की टोपी उछालने से क्या लाभ ?

टका-सा मुँह लेकर रह जाना- (लज्जित हो जाना)

टट्टी की आड़ में शिकार खेलना- (छिपकर बुरा काम करना)

टाट उलटना- (व्यापारी का अपने को दिवालिया घोषित कर देना)

टेढ़ी खीर- (कठिन काम)

टें-टें-पों-पों - (व्यर्थ हल्ला करना)

टुकड़ों पर पलना- (दूसरों की कमाई पर गुजारा करना)

( ठ )

ठन-ठन गोपाल- (मूर्ख, गरीब, कुछ नहीं)

ठगा-सा- (भौंचक्का-सा)

ठठेरे-ठठेरे बदला- (समान बुद्धिवाले से काम पड़ना)

( ड )

डकार जाना ( हड़प जाना)- सियाराम अपने भाई की सारी संपत्ति डकार गया।

डूबते को तिनके का सहारा- (संकट में पड़े को थोड़ी मदद)

डींग हाँकना- (शेखी बघारना)

डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना- (अलग-अलग होकर काम करना)

डोरी ढीली करना- (सँभालकर काम न करना)

( ढ )

ढील देना- (अधीनता में न रखना)

ढेर करना- (मारकर गिरा देना)

ढेर होना- (मर जाना)

ढोल पीटना- (जाहिर करना)

( त, थ )

तिल का ताड़ बनाना (बात को तूल देना)- सिर्फ बेहूदा, मगर मुहल्लेवालों ने यह तिल का तार कर दिया कि मैने उसे दुनयाभर गालियाँ दी।

तूती बोलना (प्रभाव जमाना )- आजकल तो आपकी ही तूती बोल रही है।

तह देना- (दवा देना)

तह-पर-तह देना- (खूब खाना)

तरह देना- (ख्याल न करना)

तंग करना- (हैरान करना)

तंग हाथ होना- (निर्धन होना)

तलवे चाटना या सहलाना- (खुशामद करना)

तिनके को पहाड़ करना- (छोटी बात को बड़ी बनाना)

तीन तरह करना या होना- (नष्ट करना, तितर बितर करना)

ताड़ जाना- (समझ जाना)

तुक में तुक मिलाना- (खुशामद करना)

तेवर बदलना- (क्रोध करना)

ताना मारना-(व्यंग्य वचन बोलना)

ताक में रहना- (खोज में रहना)

तारे गिनना- (दुर्दशाग्रस्त होना, काफी चोट पहुँचना)

तोते की तरह आँखें फेरना- (बेमुरौवत होना)

( थ )

थूक कर चाटना (बात देकर फिरना )- मै राम की तरह थूक कर चाटना वाला नहीं हूँ।

थाली का बैंगन होना- (जिसका विचार स्थिर न रहे)

थू-थू करना- (घृणा प्रकट करना)

( द,ध )

दम टूटना (मर जाना )- शेर ने एक ही गोली में दम तोड़ दिया।

दिन दूना रात चौगुना (खूब उनती )- योजनाओं के चलते ही देश का विकास दिन दूना रात चौगुना हुआ।

दाल में काला होना (संदेह होना ) - हम लोगों की ओट में ये जिस तरह धीरे -धीरे बातें कर रहें है, उससे मुझे दाल में काला लग रहा है।

दौड़-धूप करना (बड़ी कोशिश करना)- कौन बाप अपनी बेटी के ब्याह के लिए दौड़-धूप नहीं करता ?

दो कौड़ी का आदमी (तुच्छ या अविश्र्वसनीय व्यक्ति)- किस दो कौड़ी के आदमी की बात करते हो ?

दो टूक बात कहना (स्पष्ट कह देना)- अंगद ने रावण से दो टूक बात कही।

दो दिन का मेहमान (जल्द मरनेवाला)- किसी का क्या बिगाड़ेगा ? वह बेचारा खुद दो दिन का मेहमान है।

दूध के दाँत न टूटना (ज्ञानहीन या अनुभवहीन)- वह सभा में क्या बोलेगा ? अभी तो उसके दूध के दाँत भी नहीं टूटे हैं।

दम मारना- (विश्राम करना)

दम में दम आना- (राहत होना)

दाल गलना- (कामयाब होना, प्रयोजन सिद्ध होना)

दूज का चाँद होना- (कम दर्शन होना)

दाँव खेलना- (धोखा देना)

दिनों का फेर होना- (बुरे दिन आना)

दीदे का पानी ढल जाना- (बेशर्म होना)

दिमाग खाना- (बकवास करना)

दिल बढ़ाना- (साहस भरना)

दिल टूटना- (साहस टूटना)

दुकान बढ़ाना- (दूकान बंद करना)

दूध के दाँत न टूटना- (ज्ञान और अनुभव का न होना)

दूध का दूध पानी का पानी- (निष्पक्ष न्याय)

दायें-बायें देखना- (सावधान होना)

दिल दरिया होना- (उदार होना)

दो नाव पर पैर रखना- (इधर भी, उधर भी, दो पक्षों से मेल रखना)

( ध )

धज्जियाँ उड़ाना (किसी के दोषों को चुन-चुनकर गिनाना)- उसने उनलोगों की धज्जियाँ उड़ाना शुरू किया कि वे वहाँ से भाग खड़े हुए।

धता बताना- (टालना, भागना)

धरती पर पाँव न रखना- (घमंडी होना)

धाक जमाना- (रोब होना)

धुँआ-सा मुँह होना- (लज्जित होना)

धूप में बाल सफेद करना- (बिना अनुभव प्राप्त किये बूढा होना)

धूल छानना- (मारे-मारे फिरना)

धोबी का कुत्ता- (निकम्मा)

धोती ढीली होना- (डर जाना)

( न )

नौ-दो ग्यारह होना (चम्पत होना )- लोग दौड़े कि चोर नौ-दो ग्यारह हो गये।

न इधर का, न उधर का (कही का नही )- कमबख्त ने न पढ़ा, न बाप की दस्तकारी सीखी; न इधर रहा, न उधर का।

नाक का बल होना (बहुत प्यारा होना )- इन दिनों हरीश अपने प्रधानाध्यापक की नाक का बल बना हुआ है।

नाकों डीएम करना (परेशान करना )- पिछली लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को नाकों दम कर दिया।

नाक काटना (इज्जत जाना )- पोल खुलते ही सबके सामने उसकी नाक कट गयी।

नजर पर चढ़ना- (पसंद आ जाना)

नाच नचाना- (तंग करना)

नुक़्ताचीनी करना- (दोष दिखाना, आलोचना करना)

निन्यानबे के फेर में पड़ना- (धन जमा करने के चक्कर में पड़ना)

नजर चुराना- (आँख चुराना)

नमक अदा करना- (फर्ज पूरा करना, प्रत्युपकार करना)

नमक-मिर्चा लगाना- (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)

नशा उतरना- (घमण्ड उतरना)

नदी-नाव संयोग- (ऐसी भेंट/मुलाकात जो कभी इत्तिफाक से हो जाय)

नसीब चमकना- (भाग्य चमकना)

नींद हराम होना- (तंग आना, सो न सकना)

नेकी और पूछ-पूछ- (बिना कहे ही भलाई करना)

( प, फ )

पेट काटना (अपने भोजन तक में बचत )- अपना पेट काटकर वह अपने छोटे भाई को पढ़ा रहा है।

पानी उतरना (इज्जत लेना )- भरी सभा में द्रोपदी को पानी उतारने की कोशिश की गयी।

पेट में चूहे कूदना (जोर की भूख )- पेट में चूहे कूद रहे है। पहले कुछ खा लूँ, तब तुम्हारी सुनूँगा।

पहाड़ टूट पड़ना (भारी विपत्ति आना )- उस बेचारे पर तो दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा।

पट्टी पढ़ाना (बुरी राय देना)- तुमने मेरे बेटे को कैसी पट्टी पढ़ाई कि वह घर जाता ही नहीं ?

पौ बारह होना (खूब लाभ होना)- क्या पूछना है ! आजकल तुम व्यापारियों के ही तो पौ बारह हैं।

पाँचों उँगलियाँ घी में (पूरे लाभ में)- पिछड़े देशों में उद्योगियों और मेहनतकशों की हालत पतली रहती है तथा दलालों, कमीशन एजेण्टों और नौकरशाहों की ही पाँचों उँगलियाँ घी में रहता हैं।

पगड़ी रखना (इज्जत बचाना)- हल्दीघाटी में झाला सरदार ने राजपूतों की पगड़ी रख ली।

पगड़ी उतारना- (इज्जत उतारना)

पाकेट गरम करना- (घूस देना)

पहलू बचाना- (कतराकर निकल जाना)

पते की कहना- (रहस्य या चुभती हुई काम की बात कहना)

पानी का बुलबुला- (क्षणभंगुर वस्तु)

पानी देना- (तर्पण करना, सींचना)

पानी न माँगना- (तत्काल मर जाना)

पानी पर नींव डालना- (ऐसी वस्तु को आधार बनाना जो टिकाऊ न हो)

पानी-पानी होना- (अधिक लज्जित होना)

पानी-पानी करना- (लज्जित करना)

पानी पीकर जाति पूछना- (कोई काम कर चुकने के बाद उसके औचित्य का निर्णय करना)

पानी रखना- (मर्यादा की रक्षा करना)

पानी में आग लगाना- (असंभव कार्य करना)

पानी लगना (कहीं का)- (स्थान विशेष के बुरे वातावरण का असर होना )

पानी करना- (सरल कर देना)

पानी लेना- (अप्रतिष्ठित करना)

पानी की तरह बहना- (अन्धाधुन्ध करना)

पानी फिर जाना- (बर्बाद होना)

पापड़ बेलना- (दुःख से दिन काटना)

पोल खुलना- (रहस्य प्रकट करना)

पीठ ठोंकना- (साहस बँधाना)

पुरानी लकीर का फकीर होना/पुरानी लकीर पीटना- (पुरानी चाल मानना)

पैर पकड़ना- (क्षमा चाहना)

पीठ दिखलाना- (पलायन)

( फ )

फूलना-फलना (धनवान या कुलवान होना)- मेरा आशीर्वाद है; सदा फूलो-फलो।

फूला न समाना- (काफी खुश होना)

फूटी आँखों न भाना- (तनिक भी न सुहाना)

फफोले फोड़ना- (वैर साधना)

फबतियाँ कसना- (ताना मारना)

फूंक-फूंक कर कदम रखना- (सावधान होकर काम करना)

फूल झड़ना- (मधुर बोलना)

( ब )

बीड़ा उठना (दायित्व लेना)- गांधजी ने भारत को आजाद करने का बीड़ा उठाया था।

बाजी ले जाना या मारना (जीतना)- देखें, दौड़ में कौन बाजी ले जाता या मारता है।

बात बनाना (बहाना बनाना)- तुम हर काम में बात बनाना जानते है।

बगुला भगत-(कपटी)

बगलें झाँकना- (बचाव का रास्ता ढूँढना)

बन्दरघुड़की देना- (धमकाना)

बहती गंगा में हाथ धोना- (वह मौका हाथ से न जाने देना जिससे सभी लाभ उठाते हों)

बाग-बाग होना- (खुश होना)

बाँसो उछलना- (काफी खुश होना)

बाजार गर्म होना- (सरगर्मी होना, तेजी होना)

बात का धनी- (वादे का पक्का, दृढप्रतिज्ञ)

बात की बात में- (अतिशीघ्र)

बात चलाना- (चर्चा करना)

बात न पूछना- (निरादार करना)

बात पर न जाना- (विश्वास न करना)

बात बनाना- (बहाना करना)

बात रहना- (वचन पूरा करना)

बातों में उड़ाना- (हँसी-मजाक में उड़ा देना)

बात पी जाना-(बर्दाश्त करना, सुनकर भी ध्यान न देना)

बायें हाथ का खेल- (सरल होना)

बाल की खाल निकालना- (छिद्रान्वेषण करना)

बालू की भीत- (शीघ्र नष्ट होनेवाली चीज)

बेसिर-पैर की बात-(निराधार बात)

बोलबाला- (प्रसिद्ध)

( भ )

भीगी बिल्ली होना (डर से दबना)- वह अपने शिक्षक के सामने भीगी बिल्ली हो जाता है।

भाड़े का टट्टू- (गया-बीता)

भेड़ियाधसान होना-(देखा-देखी करना)

भाड़ झोंकना- (समय नष्ट करना)

भूत चढ़ना या सवार होना- (किसी बात की जिद पकड़ना, रंज के मारे आगा-पीछा भूल जाना)

भारी लगना- (असहय होना)

भनक पड़ना- (उड़ती हुई खबर सुनना)

( म )

मुँह धो रखना (आशा न रखना)- यह चीज अब मिलने को नही मुँह धो रखिए।

मुँह में पानी आना (लालच होना)- मिठाई देखते ही उसके मुँह में पानी भर आया।

मैदान मारना (बाजी जीतना)- पानीपत की लड़ाई में आखिर अब्दाली ही मैदान मारा।

मिट्टी के मोल बिकना(बहुत सस्ता)- यह मकान मिट्टी के मोल बिक गया

मुट्ठी गरम करना (घूस देना)- पुलिस की मुठ्ठी गरम करो ,तो काम होगा।

मुँह बंद कर देना (शांत कराना)- तुम धमकी देकर मेरा मुँह बंद कर देना चाहते हो

मर मिटना- (बर्बाद होना)

मांस नोचना- (तंग करना)

मोम हो जाना- (खूब नरम बन जाना)

मन फट जाना- (विराग होना, फीका पड़ना)

मिट्टी में मिलना- (नष्ट होना)

मन चलना- (इच्छा होना)

मन के लड्डू खाना- (व्यर्थ की आशा पर प्रसन्न होना)

मैदान साफ होना- (मार्ग में बाधा न होना)

मीन-मेख करना- (व्यर्थ तर्क)

मन खट्टा होना- (मन फिर जाना)

मिट्टी पलीद करना- (जलील करना)

मोटा आसामी- (मालदार आदमी)

मुठभेड़ होना- (मुकाबला होना)

( य )

यश गाना- (प्रशंसा करना, एहसान मानना)

यश मानना- (कृतज्ञ होना)

युग-युग- (बहुत दिनों तक)

युगधर्म- (समय के अनुसार चाल या व्यवहार)

युगांतर उपस्थित करना- (किसी पुरानी प्रथा को हटाकर उसके स्थान पर नई प्रथा चलाना)

( र )

रंग जमना (धाक जमना)- तुम्हारा तो कल खूब रंग जमा।

रंग बदलना (परिवर्तन होना)- जमाने का रंग बदल गया है।

रंग उतरना (फीका होना)- सजा सुनते ही अपराधी के चेहरे का रंग उतर गया।

रंग में भंग होना- (आनन्द में बिघ्न पड़ना)

रंग लाना- (प्रभाव दिखाना)

रंगा सियार- (ढोंगी)

रफूचक्कर होना- (भाग जाना)

रसातल चला जाना- (एकदम नष्ट हो जाना)

राई से पर्वत होना- (छोटे से बड़ा होना)

रीढ़ टूटना- (आधार समाप्त होना)

रोटियाँ तोड़ना- (बैठे-बैठे खाना)

रोना रोना- (दुखड़ा सुनाना)

( ल )

लोहे के चने चबाना ( कठिनाई झेलना)- भारतीय सेना के सामने पाकिस्तानी सेना को लोहे के चने चबाने पड़े।

लकीर का फकीर होना (पुरानी प्रथा पर ही चलना)- ये अबतक लकीर के फकीर ही है। टेबुल पर नही, चौके में ही खायेंगे।

लोहा मानना (श्रेष्ठ समझना)- आज दुनिया भरतीय जवानों का लोहा मानती है।

लेने के देने पड़ना (लाभ के बदले हानि)- नया काम हैं। सोच-समझकर आगे बढ़ना। कहीं लेने के देने न पड़ जायें।

लँगोटी पर (में) फाग खेलना- (अल्पसाधन होते हुए भी विलासी होना)

लाख से लाख होना- (कुछ न रह जाना)

लाले पड़ना- (मुँहताज होना)

लुटिया डुबोना- (काम बिगाड़ना)

लोहा बजना- (युद्ध होना)

लँगोटिया यार- (बचपन का दोस्त)

लहू होना- (मुग्ध होना)

लग्गी से घास डालना- (दूसरों पर टालना)

लल्लो-चप्पो करना- (खुशामद करना, चिरौरी करना)

लहू का घूंट पीना- (बर्दाश्त करना)

लाल-पीला होना- (रंज होना)

( व )

वचन हारना- (जबान हारना)

वचन देना- (जबान देना)

वक़्त पर काम आना- (विपत्ति में मदद करना)

( श, ष )

शर्म से गड़ जाना- (अधिक लज्जित होना)

शर्म से पानी-पानी होना- (बहुत लजाना)

शान में बट्टा लगना- (इज्जत में धब्बा लगना)

शेखी बघारना- (डींग हाँकना)

शौतान की आँत- (बहुत बड़ा)

शौतान की खाला- (झगड़ालू स्त्री)

शिकार हाथ लगना- (असामी मिलना)

षटराग (खटराग) अलापना- (रोना-गाना, बखेड़ा शुरू करना, झंझट करना)

( स )

श्रीगणेश करना (शुभारम्भ करना)- कोई शुभ दिन देखकर किसी शुभ कर्म का श्रीगणेश करना चाहिए।

सर्द हो जाना (डरना, मरना)- बड़ा साहसी बनता था, पर भूत का नाम सुनते ही सर्द हो गया।

साँप-छछूंदर की हालत (दुविधा)- पिता अलग नाराज है, माँ अलग। किसे क्या कहकर मनाऊँ ?मेरी तो साँप-छछूंदर की हालत है इन दिनों।

समझ (अक्ल) पर पत्थर पड़ना (बुद्धि भ्रष्ट होना)- रावण की समझ पर पत्थर पड़ा था कि भला कहनेवालों को उसने लात मारी।

सिक्का जमना (प्रभाव जमना)- आज तुम्हारे भाषण का वह सिक्का जमा कि उसके बाद बाकी वक्ता जमे ही नहीं।

सवा सोलह आने सही (पूरे तौर पर ठीक)- राम की सेना में हनुमान इसलिए श्रेष्ठ माने जाते थे कि हर काम में वे ही सवा सोलह आने सही उतरते थे।

सिर पर आ जाना (बहुत नजदीक होना)- परीक्षा मेरे सिर पर आ गयी है, अब मुझे खूब पढ़ना चाहिए।

सिर खुजलाना (बहलाना करना)- सिर न खुजलाओ, देना है तो दो।

सर धुनना (शोक करना)- राम परीक्षा में असफल होने पर सर धुनने लगी।

सर गंजा कर देना (खूब पीटना)- भागो यहाँ से, नही तो सर गंजा कर दूँगा।

सफेद झूठ (सरासर झुठ)- यह सफेद झूठ है कि मैंने उसे गाली दी।

सब्ज बाग दिखाना- (बड़ी-बड़ी आशाएँ दिलाना)

सितारा चमकना या बुलंद होना- (भाग्योदय होना)

सिप्पा भिड़ाना- (उपाय करना)

सात-पाँच करना- (आगे पीछे करना)

सुबह का चिराग होना- (समाप्ति पर आना)

सैकड़ों घड़े पानी पड़ना- (लज्जित होना)

सन्नाटे में आना/सकेत में आना- (स्तब्ध हो जाना)

सब धान बाईस पसेरी- (सबके साथ एक-सा व्यवहार, सब कुछ बराबर समझना)

( ह )

हाथ पैर मारना (काफी प्रयास )- राम कितना मेहनत क्या फिर भी वह परीक्षा में सफल नहीं हुआ।

हाथ मलना (पछताना )- समय बीतने पर हाथ मलने से क्या लाभ ?

हाथ देना (सहायता करना )- आपके हाथ दिये बिना यह काम न होगा।

हाथोहाथ (जल्दी )- यह काम हाथोहाथ होकर रहेगा।

हथियार डाल देना (हार मान लेना)- जब कुछ करते न बना तो उसने हथियार डाल दिये।

हाथ के तोते उड़ना- (अचानक शोक-समाचार सुनकर स्तब्ध हो जाना)

होश उड़ जाना- (घबड़ा जाना)

हक्क-बक्का रह जाना- (भौंचक रह जाना)

हजामत बनाना- (ठगना)

हवा लगना- (संगति का प्रभाव (बुरे अर्थ में)

हवा खिलाना- (कहीं भेजना)

हड्डी-पसली दुरुस्त करना- (खूब मारना)

हड़प जाना- (हजम कर जाना)

हल्का होना- (तुच्छ होना, कम होना)

हल्दी-गुड़ पिलाना- (खूब मारना)

हवा पर उड़ना- (इतराना)

हृदय पसीजना- (दयार्द्र होना, द्रवित होना)