Ekarthak shbd (एकार्थक शब्द)


पुस्तक- साधारणतः सभी प्रकार की छपी किताब को 'पुस्तक' कहते है।
दक्ष-जो हाथ से किए जानेवाले काम अच्छी तरह और जल्दी करता है। जैसे- वह कपड़ा सीने में दक्ष है।
निपुण-जो अपने कार्य या विषय का पूरा-पूरा ज्ञान प्राप्त कर उसका अच्छा जानकार बन चुका है।
कुशल- जो हर काम में मानसिक तथा शारीरिक शक्तियों का अच्छा प्रयोग करना जानता है।
कर्मठ- जिस काम पर लगाया जाय उसपर लगा रहनेवाला।
निबन्ध- ऐसी गद्यरचना, जिसमें विषय गौण हो और लेखक का व्यक्तित्व और उसकी शैली प्रधान हो।
लेख- ऐसी गद्यरचना, जिसमें वस्तु या विषय की प्रधानता हो।
निधन- महान् और लोकप्रिय व्यक्ति की मृत्यु को 'निधन' कहा जाता है।
मृत्यु- सामान्य शरीरान्त को 'मृत्यु' कहते है।
निकट- सामीप्य का बोध। जैसे- मेरे गाँव के निकट एक स्कूल है।
पास- अधिकार के सामीप्य का बोध। जैसे- धनिकों के पास पर्याप्त धन है।
प्रेम- व्यापक अर्थ में प्रयुक्त होता है। जैसे- ईश्र्वर से प्रेम, स्त्री से प्रेम आदि।
स्त्रेह- अपने से छोटों के प्रति 'स्त्रेह' होता है। जैसे- पुत्र से स्त्रेह।
प्रणय- सख्यभावमिश्रित अनुराग। जैसे- राधा-माधव का प्रणय।
प्रणाम- बड़ों को 'प्रणाम' किया जाता है।
नमस्कार- बराबरवालों को 'नमस्कार' या 'नमस्ते' किया जाता है।
पारितोषिक- किसी प्रतियोगिता में विजयी होने पर पारितोषिक दिया जाता है।
पुरस्कार- किसी व्यक्ति के अच्छे काम या सेवा से प्रसत्र होकर 'पुरस्कार' दिया जाता है।
पति-किसी की विवाहिता स्त्री।
महिला- भले घर की स्त्री।
स्त्री- कोई भी औरत।
पुत्र- अपना बेटा।
बालक- कोई भी लड़का।
बड़ा- आकार का बोधक। जैसे- हमारा मकान बड़ा है।
बहुत- परिमाण का बोधक। जैसे- आज उसने बहुत खाया।
बुद्धि- कर्तव्य का निश्रय करती है।
ज्ञान- इन्द्रियों द्वारा प्राप्त हर अनुभव।
बहुमूल्य- बहुत कीमती वस्तु, पर जिसका मूल्य-निर्धारण किया जा सके।
अमूल्य- जिसका मूल्य न लगाया जा सके।
मित्र- वह पराया व्यक्ति, जिसके साथ आत्मीयता हो।
बन्धु- आत्मीय मित्र। सम्बन्धी।
मन- मन में संकल्प-विकल्प होता है।
चित्त- चित्त में बातों का स्मरण-विस्मरण होता है।
महाशय- सामान्य लोगों के लिए 'महाशय' का प्रयोग होता है।
महोदय- अपने से बड़ों को या अधिकारियों को 'महोदय' लिखा जाता है।
यातना- आघात में उत्पत्र कष्टों की अनुभूति (शारीरिक) ।
विश्र्वास- सामने हुई बात पर भरोसा करना, बिलकुल ठीक मानना।
विषाद- अतिशय दुःखी होने के कारण किंकर्तव्यविमूढ़ होना।
व्यथा- किसी आघात के कारण मानसिक अथवा शारीरिक कष्ट या पीड़ा।
सेवा- गुरुजनों की टहल।
शुश्रूषा- दीन-दुखियों और रोगियों की सेवा।
साधारण- जो वस्तु या व्यक्ति एक ही आधार पर आश्रित हो। जिसमें कोई विशिष्ट गुण या चमत्कार न हो।
सामान्य- जो बात दो अथवा कई वस्तुओं तथा व्यक्तियों आदि में समान रूप से पायी जाती हो, उसे 'सामान्य' कहते है। स्वतंत्रा- 'स्वतंत्रा' का प्रयोग व्यक्तियों के लिए होता है। जैसे- भारतीयों को स्वतंत्रा मिली है।
स्वाधीनता- 'स्वाधीनता' देश या राष्ट के लिए प्रयुक्त होती है।
सखा- जो आपस में एकप्राण, एकमन, किन्तु दो शरीर है।
सुहृद्- अच्छा हृदय रखनेवाला।
सहानुभूति- दूसरे के दुःख को अपना दुःख समझना।
स्त्रेह-छोटों के प्रति प्रेमभाव रखना।
सम्राट- राजाओं का राजा।
राजा-एक साधारण भूपति।