(Sandhi vichchhed)-संधि विच्छेद


(श, ष, स )

शंकर =शम् +कर शिरोमणि=शिरः +मणि
शशांक= शश+अंक शस्त्रास्त्र=शस्त्र+अस्त्र
शताब्दी= शत + अब्दी शरच्चंद्र= शरत् + चन्द्र
शिलारोपण= शिला + आरोपण शुद्धोदन= शुद्ध + ओदन
शेषांश= शेष + अंश शीघ्रातिशीघ्र= शीघ्र + अतिशीघ्र
श्वासोच्छवास= श्वास + उत् षोडशोपचार= षोडस + उपचार
सदहस्ती= सत् + हस्ती संतुष्ट= सम् + तुष्ट
संदेह= सम् + देश संघर्ष= सम् + घर्ष
समाचार= सम् + आचार संकट= सम् + कल्प
समालोचना= सम् + आलोचना सर्वोच्च= सर्व + उच्च
सम्मुख= सम् +मुख सत्कार= सत् + कार
सद्गुरु= सत् +गुरु सज्जन=सत् +जन
संसार=सम् +सार सदाचार= सत् +आचार
संयम= सम+यम स्वाधीन= स्व+अधीन
साश्र्चर्य= स+आश्र्चर्य सावधान= स+अवधान
सच्चरित्र= सत+चरित्र सदभाव=सत+भाव
सन्धि=सम+धि स्वर्ग= स्वः+ग
शुद्धोदन= शुद्ध+ओदन स्वार्थ= स्व+अर्थ
सदभावना= सत+भावना सच्छास्त्र=सत्+शास्त्र
संचय=सम+चय संवाद=सम् +वाद
सीमान्त=सीमा+अंत सप्तर्षि= सप्त+ऋषि
समन्वय= सम् +अनु +अय सत्याग्रह= सत्य+आग्रह
संगठन= सम+गठन सद्विचार=सत्+विचार
समुच्चय= सम+उत्+चय सर्वोदय= सर्व+उदय
संकोच= सम् + कोच श्रेयस्कर=श्रेयः +कर
सुरेन्द्र= सुर+इन्द्र सदानन्द= सत्+आनन्द
सद्धर्म= सत्+धर्म संकल्प= सम् +कल्प
संयोग= सम् +योग संयम =सम् +यम
संवत्= सम+वत् साष्टाग= स+अष्ट+अंग
सर्वोत्तम= सर्व+उत्तम सत्रिहित= सत्+निहित
समुदाय= सम+उत्+आय सूर्योदय= सूर्य+उदय
सदवाणी= सत्+वाणी स्वयम्भूदय= स्वयम्भू+उदय
संतप्त= सम् + तप्त षड्दर्शन= षट्+दर्शन
स्वाध्याय= स्व + अध्याय सर्वाधिक = सर्व + अधिक
सर्वोच्च= सर्व + उच्च सत्याग्रही = सत्य + आग्रही
स्वाभिमानी = स्व + अभिमानी सर्वोत्तम= सर्व + उत्तम
स्वालंबन = स्व + अवलंबन स्वर्णाक्षरों = स्वर्ण + अक्षरों
स्वाध्याय = स्व + अध्याय स्वाधीनता= स्व + आधीनता
सत्याग्रह = सत्य + आग्रह शरीरांत= शरीर + अंत
सदुत्तर= सत् + उत्तर स्वागत =सु+आगत
सन्तोष=सम् +तोष सरोज =सरः +ज
सद्वंश= सत् + वंश सरोवर =सरः +वर
सतीश =सती +ईश सदैव =सदा +एव
षडानन= षट्+आनन षण्मास= षट्+मास
संकल्प= सम् +कल्प संपूर्ण= सम्+पूर्ण
संबंध= सम् +बंध संरक्षण= सम्+रक्षण
संवाद= सम्+वाद संविधान= सम्+विधान
संसार= सम्+सार सज्जन= सत्+जन
सम्मान= सम्+मान सम्मति= सम्+मति
स्वच्छंद= स्व +छंद स्वागत= सु+आगत
सन्नद= सत् +नद संहारैषण= संहार + एषण
समीक्षा= सम् + ईक्षा समुचित= सम् + उचित
संस्कृति= सम् + कृति संगीत= सम् + गीत
संगठन= सम् + गठन संदेह= सम् + देह
सन्तान= सम् +तान सदुप्रयोग= सत् +उपयोग
संसर्ग= सम् + सर्ग सत्यासक्त= सत्य + आसक्त
सर्वोदय= सर्व + उदय समाधान= सम् + आधान
सदिच्छा= सत् + इच्छा समालोचक= सम् + आलोचक
सतीच्छा= सती + इच्छा सदवतार= सत् + अवतार
सत्कार= सत् + कार सम्राज = सम् + राज
संकीर्ण= सम् + कीर्ण संयोग= सम् + योग
संभव= सम् + भव संयुक्त= सम् + युक्त
संग्राम= सम् + ग्राम सहायतार्थ= सहायता + अर्थ
सज्जन= सत् + जन सत्साहित्य= सत् + साहित्य
संलग्न= सम् + लग्न संघाराम= संघ + आराम
सर्वोपरि= सर्व + उपरि सर्वागीण= सर्व + अंगीन
सारांश= सार + अंश साश्चर्य= स + आश्चर्य
साग्रह= स + आग्रह सावधान= स + अवधान
साधूहा= साधु + उहा सिद्धांत= सिद्ध + अन्त
सिहांसन= सिंह + आसन सुधेच्छा= सुधा + इच्छा
सुन्दरौदन= सुन्दर + ओदन सुरानुकूल= सुर + अनुकूल
सेवार्थ= सेवा + अर्थ सोत्साह= स + उत्साह
सोऽहम= सः + अहम् स्वार्थ= स्व + अर्थ
स्वेच्छा= स्व + इच्छा सहोदर= सह + उदर
सम्मति= सम् + मति स्वैर= स्व + ईर
स्वाधीन= स्व + अधीन सज्जाति= सत् + जाति
समुदाय= सम् + उदाय समुद्रोर्मि= समुद्र + उर्मि
समृद्धि= सम् + ऋद्धि सख्युचित= सखी + उचित
सच्छात्र= सत् + शास्त्र संभव= सम् + भव
संपूर्ण= सम् + पूर्ण संक्रान्ति= सम् + क्रान्ति
संहार= सम् + हार संवत्= सम् + वत्
संसार= सम् + सार संपर्क= सम् + पर्क
सन्धि= सम् + धि संगम= सम् + गम
संकोच= सम् + कोच संचय= सम् + चय
स्थानान्तर= स्थान + अंतर स्वच्छन्द= स्व + छन्द
स्वात्मबल= स्व + आत्मबल सुखोपभोग= सुख + उपभोग
साभिलाष= स + अभिलाष सावकाश= स + अवकाश
सम्मानास्पद= सम् + मान + आस्पद संग्रहालय= सम् + ग्रह + आलय
सदसद्विवेकिनी= सत् + असत् + विवेकिनी सच्चिदानन्द= सत् + चित् + आनन्द
सर्वतोभावेन= सर्वतः + भावेन स्वर्गारोहण= स्वर्ग + आरोहण
स्वेच्छाचारी= स्वेच्छा + आचारी

(ह, ज्ञ )

हिमांचल = हिम + अंचल हिमालय= हिम + आलय
हरिश्चन्द्र= हरिः + चन्द्र ह्रदयानन्द= ह्रदय + आनन्द
हताश= हत + आश हितोपदेश= हित + उपदेश
हरीच्छा= हरि + इच्छा ह्रदयहारिणी= ह्रदय + हारिणी
हिमाच्छादित= हिम + आच्छादित हरेक= हर + एक
ज्ञानोपदेश= ज्ञान+उपदेश हृद्येश= हृद् + देश